वर्ष भर घोटालों व आरोपों से घिरी रहीं मायावती

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के आदेश के बाद सीबीआई ने पहले एनआरएचएम में लखनऊ में बाद में पूरे राज्य में हुये घोटाले की जांच शुरू की है। जांच के लिए सीबीआई को पहले तीन माह का समय मिला लेकिन ब्यूरो के अनुरोध के बाद समय और बढ़ा दिया गया। तर्क यह कि राज्य सरकार जांच में सहयोग नहीं कर रही है।
एनआरएचएम में कितना घोटाला हुआ है यह अभी तक पता नहीं चल सका है लेकिन इस घोटाले की छीटें मायावती तक पहुंच गये क्योंकि भाजपा ने कुछ ऐसे तथ्य उजागर किए जिसके आधार पर कहा जा रहा है कि एनआरएचएम का पैसा माया के भाई आनन्द की कम्पनियों पर लगाए गए। इस घोटाले में माया के करीबी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा भी हिस्सेदार थे। माया सरकार पर दूसरा आरोप था कि मनरेगा में जाब कार्ड बनाने में घपला किया गया जिसमें ऊपर तक के अधिरियों की मिलीभगत थी।
बुंदेलखंड के महोबा, ललितपुर, हमीरपुर और झांसी में ऐसे मामले सामने आये जिसने इन आरोपों को काफी हद तक सही साबित कर दिया। मायावती ने मामले को संज्ञान में लिया और जांच के बाद कार्रवाई करते हुए अधिकारियों को निलंबित कर दिया। मनरेगा में पूरे राज्य में करोड़ों रूपये के घपले का आरोप है लेकिन मायावती खुलकर इस बात को मानने को तैयार नहीं जबकि विपक्षी लगातार इसमें माया सरकार के आला अधिकारियों की मिलीभगत तो कह ही रहे हैं साथ ही वह यह भी कहते हैं कि उपरोक्त भ्रष्टाचारी अधिकारियों को मुख्यमंत्री का संरक्षण मिला है। राज्य सरकार इन आरोपों को नकारती रही लेकिल कोई ठोस जवाब नहीं दिया।
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिह अहलूवालिया झांसी आये और काम पर असंतोष जताया। उन्होंने आरोप लगा कि बसपा सरकार ने विशेष पैकेज की राशि को पार्कों, स्मारकों और मूर्तियों पर खर्च कर दिया। विपक्ष खासकर भाजपा ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि यदि उनके आरोप गलत हैं तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
भाजपा ने सभी दस्तावेज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजकर उनसे कार्रवाई का आग्रह किया। दर्जनों आरोप लगने के बाद भी मायावती के रूख में नर्मी नहीं आयी और ऐसा लगा कि उन्होंने विपक्षियों के आरोपों पर ध्यान ही नहीं दिया लेकिन जनता को जरूर मायावती के कार्यों की तरह-तरह की जानकारियां मिलती रहीं।












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