उत्‍तर प्रदेश में तेजी से ऊपर चढ़ रहा चुनावी पारा

Election temperature goes on in Uttar Pradesh
लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में सियासी जंग तो चुनाव की तारीखों के साथ ही शुरू हो गयी है, जिसके साथ राजनीतिक तापमान और चढऩे लगा है। बड़े राजनीतिक दल जहां जीत के समीकरण बिठाने की जुगत में हैं वहीं छोटे राजनीतिक दल अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं। यूपी बंटवारे का मुद्दा इस सियासी महासमर का मु य हिस्सा बन रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश की मुख्‍यमंत्री मायावती द्वारा पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने और यूपी के विभाजन का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया था।

केन्द्र सरकार ने प्रस्ताव पर कुछ सवाल उठाये हैं मगर इस प्रस्ताव से पैदा हुयी राजनीतिक आग की आंच से सभी राजनीतिक दल प्रभावित हैं। चुनाव घोषित होने के साथ ही राजनीतिक दल इसे मुद्दा बनाने में जुट गये हैं। लोकमंच के नेता अमर सिंह तो इसे अपनी शुरूआती जीत बता चुके हैं और उनकी योजना है कि विधानसभा चुनाव में पूर्वाचल विरोधियों को करारी पराजय हो। सिंह ने इस मुद्दे को पूर्वांचल के विकास से जोड़ा और यह कहना शुरू किया कि बिजली पूर्वी उत्तर प्रदेश पैदा करे और रोशनी बादलपुर और सैफई में जले यह उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

उल्लेखनीय है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के सिध्दार्थनगर जिले के इटावा विधान सभा के कांग्रेसी विधायक ईश्वर चन्द शुक्ला ने सबसे पहले पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने का प्रस्ताव विधान सभा में बहस के लिए पेश किया था मगर कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रंग सरकार द्वारा राज्य सरकार के उत्तर प्रदेश विभाजन के प्रस्ताव को लौटा देने के बाद कांग्रेस के हांथ से यह मुद्दा निकल गया है जबकि बसपा नेता इस मुद्दे को इस चुनाव में पूरी तरह कैद करना चाहते हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि यदि वर्ष 2007 मे हुए यूपी विधान सभा चुनाव को आधार बनाया जाय तो पूर्वांचल की 177 सीटों में से बसपा को 97 सीटे मिली थी, यानि यह कि बसपा की कुल 206 विधायकों वाली पार्टी में लगभग 47 प्रतिशत विधायक पूर्वांचल के थे। बसपा इस 97 सीट में से एक भी सीट खोना नहीं चाहती है। वर्ष 2007 के चुनाव में पूर्वांचल में सपा 44, भाजपा 19 और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं।

इस तरह बसपा ने पूर्वांचल का मुद्दा उठाकर इस क्षेत्र में अपनी पकड़ को मजबूत किया है। वर्ष 2002 के चुनाव में भी बसपा को इतनी कामयाबी नहीं मिली थी जितनी इस क्षेत्र में वर्ष 2007 में मिली। पूर्वांचल के मुद्दे पर इस अंचल की 177 सीटों पर आरंभिक रूप से बसपा ज्यादा फायदा में है। यह अलग बात है कि यह पहला अवसर है जब सत्ता में रहते हुए बसपा चुनाव मैदान में होगी और उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना करना होगा।

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