इंजीनियर चला रहा था मेडिकल में दाखिले का रैकेट

Techie dupes man over MBBS seat, arrested
दिल्ली (ब्यूरो)। एम्स जैसे मेडिकल कालेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठगने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने एक ठग को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार रंजन कुमार ने सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से बीटेक है। गिरोह समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर एम्स और पीजीआई, चंडीगढ़ जैसे मेडिकल संस्थानों में दाखिला दिलाने का झांसा देता था।

जब लोग इनसे संपर्क करते थे तो ये 25 से 30 लाख रुपये ऐंठ लेते थे। इसके बाद उसे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के हस्ताक्षर से तैयार किया गया फर्जी सिफारिशी पत्र थमा देते थे। पुलिस इस गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश रही है। दक्षिण जिला डीसीपी छाया शर्मा के अनुसार भटिंडा निवासी परमजीत सिंह ने हौजखास थाने में शिकायत दी थी कि उसने एक समाचार पत्र में मेडिकल संस्थानों में दाखिला दिलाने का विज्ञापन पढ़ा।

विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबरों पर बात की गई तो रंजन कुमार और मनंजय कुमार ने उनकी बेटी का दाखिला एम्स के एमडीएस पाठ्यक्रम में दाखिला कराने के नाम 25 लाख रुपये मांगे। 24.5 लाख रुपये इन्हें दे दिए गए। पैसे लेने के बाद इन्हें स्वास्थ्य मंत्री का फर्जी सिफारिशी पत्र पकड़ा दिया और 20 दिसंबर को एम्स में काउंसिलिंग के लिए आने के लिए कहा।

जब परमजीत एम्स पहुंचा तो वहां कोई काउंसिलिंग नहीं हो रही थी। मामला दर्ज कर हौजखास थानाध्यक्ष कुलबीर सिंह, इंस्पेक्टर नीरज कुमार सहित अन्य की टीम ने तफ्तीश की। पुलिस ने पीड़ित परमजीत के सहयोग से एक आरोपी रंजन कुमार को एम्स से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने साथी मनंजय कुमार के साथ ठगी का रैकेट शुरू किया था। जब आरोपी इनसे संपर्क करता था तो ये उससे मीटिंग करते थे।

इसमें ये मिनिस्टर कोटे से दाखिला करवाने की बात कहते और गुलाब नबी आजाद का हस्ताक्षर किया हुआ फर्जी सिफारिशी लैटर दिखाते थे। इससे पीड़ित को उन पर विश्वास हो जाता था। इसके बाद ये पीड़ित से 25 से 30 लाख रुपये ऐंठ लेते थे। पुलिस ने रंजन के कब्जे से लैपटॉप बरामद किया और इनके तीन से चार बैंक खातों को सील किया है।

गिरोह के सदस्यों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का साइन किया हुआ लैटर हथिया रखा था। ये उस लैटर को स्कैन कर दूसरा लैटर तैयार कर लेते थे। फर्जी लैटर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के ओरिजनल साइन भी स्कैन कर लेते थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का साइन किया हुआ लैटर मिलने से पीड़ित खुश हो जाता था कि प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में दाखिला हो जाएगा। ये पीड़ित से कैश में रकम लेते थे।

पुलिस के अनुसार, समस्तीपुर, बिहार निवासी रंजन कुमार ने सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से बीटेक किया हुआ है। बीटेक करने के बाद इसने गुड़गांव, दिल्ली और नोएडा की कई कंपनियों में नौकरी की। इसके बाद रेलवे में कांट्रेक्टर के रुप में काम करने लगा। इस दौरान ये मनंजय के संपर्क में आया और लोगों से ठगी करने लगा।

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