मायावती कभी दलितों के घर नहीं जातीं: राहुल

एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए श्री गांधी लोगों के सामने मुख्यमंत्री के बारे में कई बातें कहीं। उन्होंने खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, महात्मा गांधी राट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में धांधली, किसानों की समस्या के साथ बुंदेलखंड में दिये गये विशेष पैकेज का मामला भी रखा। श्री गांधी ने कहा कि बसपा सिर्फ नाम के लिए दलितों की राजनीति करती है लेकिन बसपा प्रमुख मायावती को दलितों के हितों से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि मायावती बातें कुछ भी करें लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद वह किसी दलित के घर नहीं गयीं और न ही कभी उनका हाल जानना चाहा।
उन्हें तो सिर्फ दलितों का वोट चाहिये। श्री गांधी ने कहा कि बसपा ने दलितों की सुध लेनी उस वक्त बंद कर दी थी जब सुश्री मायावती का सत्ता हासिल करने का मकसद पूरा हो गया। बसपा के लिए दलित एक मोहरा मात्र जिन्हें सत्ता तक पहुंचने के लिए प्रयोग किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने हमेशा दलितों के हितों का ध्यान रखा और उनके विकास की योजनायें बनायीं। उन्होंने बुंदेलखंड के विकास के लिये दिये गये विशेष पैकेज का मुद्दा भी उठाया और राज्य के लोक निर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी का नाम लिये बिना कहा कि इस पैकेज का ज्यादा फायदा राज्य के एक मंत्री ने उठाया है।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसानों के लिये ट्रैक्टर भेजे थे ताकि किसानों को खेती में आसानी हो लेकिन ट्रैक्टर मंत्री के बेटे उठा ले गये जबकि मंत्री के बेटे किसान नहीं पूंजीपति हैं। उन्होंने खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वकालत करते हुये कहा कि केन्द्र सरकार इसे किसानों के फायदे के लिये लेकर आयी थी। उन्होंने कहा कि 9 अक्तूबर 2007 को लखनऊ में बसपा की रैली में कहा गया था कि मनरेगा से गरीबों का फायदा नहीं होता, यह सच कि मनरेगा से गरीबों का फायदा नहीं होता क्योंकि गरीब बेरोजगारों के लिये आयी इस योजना की राशि को बसपा के पदाधिकारी और राज्य के मंत्री खा जाते हैं।












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