बॉस ने कहा जाओ अन्ना को सपोर्ट करो

इसमें सबसे पहलना नाम आता है टोयोटा किर्लोस्कर का, जहां के 5000 कर्मचारी दो शिफ्ट में फ्रीडम पार्क पहुंचे। कंपनी की कर्मचारी यूनियन के प्रमुख दीपक एसआर के नेतृत्व में यहां के टेक्नोक्रेट्स और प्रबंधन विशेषज्ञों ने अन्ना के आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किर्लोस्कर के क्वालिटी इंस्पेक्टर प्रकाश भजंत्री और प्रवीण एसई फ्रीडम पार्क के प्रांगण में कार्यक्रम की क्वालिटी को बनाये रखने के लिए वॉलेंटियर्स को दिशा-निर्देश दे रहे थे। इनका काम था कि वो कार्यक्रम के हर काम की क्वालिटी चेक करें, ताकि आगे उससे भी अच्छा कर सकें।
एक्सेंचर में काम करने वाले सुरेश शुक्ल अपनी कंपनी में एसोसिएट मैनेजर हैं। वो यहां पर प्रांगण में लोगों के बैठने की व्यवस्था का जायेजा ले रहे थे। वहीं एचपी के सौरभ शुक्ला, दीप्ती सिंह प्रांगण की व्यवस्था की देखरेख में अपना योगदान दे रही थीं। स्वास्थ्य एवं मानसिक समस्याओं के काउंसिलर प्रकाश जी सचदेव यहां लोगों के अंदर ऊर्जा पैदा करने का काम कर रहे थे, ताकि उनके अंदर देश भक्ति का जज्बा पैदा हो।
इस प्रांगण में इंडिया अगेंस्ट करप्शन की टीम में सबसे अच्छी बात यह थी कि 40 हजार से 1 लाख रुपए तक सैलरी पाने वाले से लेकर 5 हजार कमाने वाले में कोई फर्क नहीं था। किसी का औधा कोई भी हो, काम काम होता है। इसी भावना के साथ कई टेक्नोक्रैट पार्किंग व्यवस्था देख रहे थे, तो कई कुर्सियां लगाने में जुटे थे। तो कई पुलिस के साथ ट्रेफिक को हैंडल करने में जुटे थे। यही नहीं जब अन्ना का कार्यक्रम समाप्त हुआ तो बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करने वाले युवाओं ने खुद से कुर्सियां हटाने का काम भी किया। कुल मिलाकर देखा जाये तो टीम अन्ना अब महज अरविंद केजरीवाल, मनीष सिशोधिया, प्रशांत भूषण, आदि तक सीमित नहीं रह गई है। देश के कोने-कोने में मौजूद इंडिया अगेंस्ट करप्शन के वॉलेंटियर्स भी अब टीम अन्ना के अभिन्न सदस्य हैं, जो उन्हीं के विचारों पर चल रहे हैं।












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