अन्ना के लोकपाल बिल को मिला माया का साथ

मायावती ने कहा कि कांग्रेस जानबूझकर सशक्त लोकपाल बिल लाना नहीं चाहती क्योंकि अगर लोकपाल बिल बनता है तो सबसे ज्यादा कांग्रेस के ही मंत्री भ्रष्टाचारी निकलेंगे। जिनसे बचने के लिए वो लोकपाल बिल से कतरा रही है। मायावती ने साफ तौर पर कहा कि यूपी प्रांत भ्रष्टचारी मंत्रियो के कारण कष्ट सह रहा है, यह मंत्री बसपा के नहीं बल्कि पिछली राजनैतिक पार्टियों के हैं। मायावती ने कहा कि केन्द्र सरकार ना तो भ्रष्टाचार और ना ही कालेधन के मामले में गंभीर है। उसने कानून का भी मजाक बना डाला है। ना तो वो काले धन को वापस लाना चाहती है और ना ही वो काले धन के मालिकों का नाम उजागर कर रही है। इससे साफ है कि काले धन के मालिक उसी की पार्टी के हैं। जिन्हें वो बचा रही है।
मायावती ने कहा कि बसपा हमेशा से भ्रष्टाचार के खिलाफ रही है। इसलिए वो चाहती है कि सशक्त लोकपाल बिल बनें वो भी आम सहमति से। सभी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम भी जनता का आदमी होता है इसलिए उन्हें भी लोकपाल के दायरे में होना चाहिए। बिना पीएम के लोकपाल का कोई मतलब नहीं है। माया ने सीबीआई को भी लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने लोकायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी नेताओ पर कार्रवाई की है।
जबकि कर्नाटक और दिल्ली प्रदेश की सरकारों ने लोकायुक्त के रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की। यूपी में जनहित गारंटी कानून में अधिकारियों की जवाबदेही तय की गयी है जबकि अन्य पार्टियों ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। माया ने यह भी कहा कि लोकपाल में दलित समाज का उचित प्रतिनिधित्व देना चाहिए। मायावती ने कहा कि जो भी बिल पेश हो वो डा. भीवराव अंबेडकर के द्वारा बनाये गये संविधान की परिधि में हों। भ्रष्टातचार की लड़ाई में बसपा देश के साथ है।
माया ने कहा कि सरकार को लोकपाल बिल हर तरह से बेकार है, उस बिल के जरिये भ्रष्टाचार का भूत भगाया नहीं जा सकता है। मायावती की इन बातों से स्पष्ट हो गया है कि उन्होंने अन्ना और अन्ना टीम का समर्थन कर दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि माया की इन बातों का जवाब केन्द्र सरकार कैसे देती है?












Click it and Unblock the Notifications