दिल्ली: धोखाधड़ी में 65 साल की उम्र में 5 साल की सजा

जिला न्यायालय रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विरेंद्र कुमार गोयल ने फैसले में कहा कि सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोप सही है। अदालत ने यह भी कहा कि ड्राफ्ट पर किए गए हस्ताक्षर आरोपी के हैं इसके स्पष्ट सबूत अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष पेश किया। सजा सुनाए जाने से पूर्व दोषी के उम्र का हवाला देते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने प्रोवेशन पर छोड़ने की मांग की थी। लेकिन, अदालत ने कहा कि इस तरह के मामले में दोषी के साथ किसी प्रकार की रियायत नहीं बरती जा सकती। जिसके बाद अदालत ने गुड़गांव निवासी आरोपी विजय खन्ना (65) को फर्जीवाड़े में दोषी करार देते हुए पांच वर्ष की कैद और 35 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई। साथ ही पांच लाख रुपये बतौर मुआवजा देने के भी आदेश दिए हैं।
पेश मामले के मुताबिक बी.एस. छाबड़ा ने शिकायत में कहा था कि वह वर्ष-1994 में एक सम्मेलन में भारत आया था। उसी समय एन.के. जैन नामक एक व्यक्ति उससे मिला था। उसने उससे कहा कि वे लोग एनआरआई कंसलटेंसी की स्थापना कर रहे हैं। जिसमें उन्हें पार्टनर बनाना चाहते हैं। इसके लिए छाबड़ा से पांच लाख रुपये का लोन और तीन लाख 12 हजार रुपये उधार लिए गए। बाद में विजय खन्ना की ओर से 25 सौ यूएस डॉलर का ड्राफ्ट छाबड़ा को दिया गया। यूएसए के जिस केमिकल बैंक और शाखा का ड्राफ्ट दिया गया था, वह उस जगह पर था ही नहीं। जिसके बाद छाबड़ा ने अपराध शाखा में मामला दर्ज कराया था।












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