केजरीवाल ने पूछा- झूठा कौन प्रणब पीएम, या सिंघवी?

Social activist Arvind Kejriwal
नई दिल्‍ली। अन्‍ना हजारे के एक दिवसीय अनशन की पूर्वसंध्‍या पर टीम अन्‍ना के प्रमुख सदस्‍यों ने राजधानी में प्रेसवार्ता में सरकारी लोकपाल बिल का पुरजोर विरोध किया। सबसे पहले वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता शांति भूषण ने अपनी बात रखी। उन्‍होंने कहा- सरकारी लोकपाल पोस्‍टमैन के समान होगा। वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार का लोकपाल बिल प्रोमोशन ऑफ करप्‍शन है। वहीं अन्‍ना ने इन सबके लिए राहुल गांधी को जिम्‍मेदार ठहराया।


अरुणा रॉय ने कहा कि लोकपाल बिल सरकार ने तो लोकपाल बिल का मजाक बना डाला है। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने सीधे सरकार से सवाल पूछा कि कौन झूठा है? प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री या अभिषेक मनु सिंघवी?
केजरीवाल ने कहा- सरकार ने स्‍टैंडिंग कमेटी में 30 सदस्‍यों का चयन किया, जिनमें से दो कभी आये ही नहीं और 17 ने सरकारी लोकपाल बिल का विरोध किया। महज 11 लोगों द्वारा बनाये गये लोकपाल को सरकार संसद में पास कराना चाहती है। प्रणब मुखर्जी ने सदन में कहा था कि संसद इस बात पर सहमत है कि सिटीजन र्चाटर और लोअर ब्‍यूरोक्रेसी को लोकपाल के दायरे में लाया जाये। पीएम ने भी यह बात दोहरयी थी। अब स्‍टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन अभिषेक मनु सिं‍घवी कहते हैं कि उस दिन संसद में सहमति नहीं बनी थी।

मेरा सवाल यह है कि उस दिन संसद में प्रणब मुखर्जी झूठ बोल रहे थे या प्रधानमंत्री और या अब मनुसिंघवी झूठ बोल रहे हैं। इनमें से झूठा कौन है? हमने सरकार के सामने 34 प्‍वाइंट रखे थे, महज दोतीन बातों को माना। बाकी को सिरे से खारिज कर दिया। जो बात मानी वो थी कि लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिया जायेगा।

सरकार के एक मंत्री कहते हैं कि राहुल गांधी की मांग पर स्‍टैंडिंग कमेटी ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने का निर्णय लिया। जरा सोचिये तीन महीने में ये लोग सिर्फ लोकपाल को संवैधानिक दर्जा ही दे पाये हैं। न तो भ्रष्‍टाचार खत्‍म हुआ और न ही किसी को कुछ हासिल हुआ। सीबीआई, पीएम, ग्रुप सी, ग्रुप डी, सिटिजन चार्टर, न्‍यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने से सरकार अभी भी कतरा रही है। असल में सरकार का लोकपाल खाली खोखले टिन के डिब्‍बे की तरह है।

सरकार के बिल ने लोकपाल को जांच के अधिकार नहीं दिये हैं। यह फैसला लेकर स्‍टैंडिंग कमेटी ने देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। उसने सीबीआई को तोड़ने का काम किया है। सरकार के मुताबिक भ्रष्‍टाचार पकड़े जाने पर पहले लोकपाल सीबीआई को शिकायत भेजेगा फिर सीबीआई जांच करेगी और फिर वो लोकपाल को भेजेगी और लोकपाल उसे अदालत में पेश करेगा। यह सब गोका अपर ब्‍यूरोक्रेसी में, क्‍योंकि ग्रुप सी और डी को तो उन्‍होंने शामिल ही नहीं किया।

सरकार ने कहा कि मीडिया, कर्पोरेट, एनजीओ को लाया जाये, हम कहते हैं पहले राजनीतिक पार्टियों को दायरे में लायें, उसके बाद जिसे चाहे उसे लोकपाल के दायरे में रख लें।

सरकार जिस लोकपाल को बनाने की बात कर रही है वो खुद पूरी तरह भ्रष्‍ट होगा, तो वो भ्रष्‍टाचार कैसे मिटायेगा। दो साल बाद यही लोग कहेंगे कि अन्‍ना जी ने लोकपाल बनवाया था और अब भ्रष्‍ट निकला।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+