लोकपाल मुद्दे पर कांग्रेस में ही मतभेद, 3 सदस्यों ने जताई असहमति

Abhishek Manu Singhvi
नई दिल्ली। इस सत्र में लोकपाबल बिल बनेगा कि नहीं इस पर संशय पूरी तरह से बरकरार है। जहां सरकार अन्ना और उनकी टीम से इस मुद्दे पर परेशान है वहीं उसके अपनों ने भी उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को स्टेंडिंग कमेटी की बुधवार को आखिरी बैठक हुई। जिनमें 30 से 16 मुद्दे ऐसे थे जिन पर एक राय नहीं बन पायी है। लेकिन असमति को दर्ज करते हुए भी कमेटी ने बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक लोकपाल ड्राफ्ट रिपोर्ट को संसद में पेश होना है।

जिन कांग्रेसियों ने इस ड्राफ्ट का विरोध किया है उनके नाम है कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बेहद करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन, दीपदास मुंशी और पीटी थॉमस। इन तीनो लोगों की मांग है कि ग्रुप सी के कर्मचारियों को लोकपाल दायरे में होना चाहिए। भाजपा तो इस ड्राफ्ट का विरोध कर ही रही है। लेकिन कांग्रेस के तीनों नेता लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के पक्ष में है।

सिटिजन चार्टर के न होने पर और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुख की नियुक्ति के तरीके पर भाजपा और वाम दल के सदस्यों ने असहमति दर्ज कराई है। सूत्रों ने बताया कि मसौदे में कॉर्पोरेट, मीडिया और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को भी लोकपाल के दायरे में लाने की अनुशंसा की गई है।

जबकि टीम अन्ना का कहना है कि सीबीआई और सीवीसी को भी लोकपाल के दायरे में होना चाहिए। इन दोनों के ना होने पर यह लोकपाल बिल केवल खाली टीन के डब्बे की तरह खोखला साबित होगा। अन्ना ने पहले ही सरकार पर धोखाधड़ी का आरोप लगा दिया है। वैसे अन्ना और अन्ना के टीम ने 27 दिसंबर से अनशन का ऐलान कर दिया है। अगर इस बार आंदोलन और अनशन हुआ तो वो सरकार के लिए काफी मुश्किलें खड़ा कर सकता है।

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