अज्ञात शवों ने किया खाकी वालों की जीना हराम

इस तरह के इंतजामों के लिए पुलिस महकमे के नियम चुप हैं। पुलिस वालों की दिक्कत का अंदाजा इसी से ही लगाया जा सकता है कि कालुआना माइनर में गत सप्ताह में ही लगभग दो दर्जन शव नहर में आ चुके हैं। खाकीधारियों की परेशानी का आलम यह है कि गोरीवाला पुलिस चौकी के मुलाजिम एक शव का पोस्टमार्टम करवाकर चौकी पहुचते नहीं तब तक नहर मे और शव आ जाता है। कई बार तो दो-दो शव आ जाते है जिस कारण चौकी का अन्य कार्य भी प्रभावित होता है।
उल्लेखनीय है कि गोरीवाला के नजदीक नहर का अंतिम छोर (टेल) होने के कारण माइनर शव गृह बनकर रह गया है। पंजाब के गोलेवाला हैड से चलने वाले इस माइनर में पीछे से बहकर आने वाली लाशें कालुआना टेल पर आ जाती हैं। हालाकि शवों को गोलेवाला हैड पर भी निकाला जा सकता है परतु वहा तैनात कर्मी उन्हें हरियाणा की और धकेल देते है।
एक पुलिस कर्मी ने बताया कि ज्यादा शव गली-सड़ी अवस्था में होने के कारण उनका पोस्टमार्टम करवाने के लिए रोहतक जाना पड़ता है। शव को नहर से बाहर निकालने के लिए चद्दर, मजदूर, गाड़ी आदि का खर्च स्वयं वहन करना पड़ता है। वहीं शव को पहचान के लिए 72 घण्टे तक अस्पताल में रखा जाता है व इसकी जानकारी आसपास के थानों में दी जाती है। शव की हालात खराब होने पर पोस्टमार्टम डबवाली के सामान्य अस्पताल में नहीं हो पाता व रोहतक मेडिकल कालेज में पोस्टमार्टम करवाकर शव का अन्तिम संस्कार डबवाली लाकर किया जाता है।
पुलिस कर्मियों का कहना है कि इस बारे विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है क्योंकि पंजाब राज्य के शव की यहा पहचान नहीं हो पाती व यदि पंजाब के शवों को इस नहर में हैड से छोड़े जाने से रोका जाए तो शवों की पहचान वहा हो सकती है व यहा भी स्थित सामान्य हो सकती है। क्षेत्र के दर्जनों गावों में पेयजल सप्लाई देने वाली इस नहर का पानी शवों के कारण दूषित होने से बच सकता है।
पड़ोसी राज्य राजस्थान में शव मिलने की स्थिति में कमेटी के कर्मचारी व डाक्टरों की टीम मौके पर पहुचकर शव के हालात देखकर या तो उसे पहचान के लिए रखा जाता है या पोस्टमार्टम करके अतिंम संस्कार कर दिया जाता है। जबकि हरियाणा में इससे उल्टा नियम है व पुलिस विभाग को अन्य विभागों के पीछे पीछे भागना पड़ता है क्योंकि..डयूटी जो करनी है।












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