कैमरे में घूस लेते पकड़े गए आठ पार्षद, इनमें छह महिलाएं

स्टिंग ऑपरेशन में सत्ताधारी भाजपा के छह और कांग्रेस की दो पार्षद भी शामिल हैं। दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने पार्षद निलंबित कर दिए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने छह पार्षदों को निलंबित कर दिया है। साथ ही, यह साबित करने की कोशिश की है हमारी कमीज से उनकी ज्यादा गंदी है। इतना ही नहीं छोटी-छोटी बातों पर एमसीडी सदन को ठप करने और एक दूसरे को देख लेने वाले भाजपा-कांग्रेस के पार्षद स्टिंग के नाम पर खामोश थे। स्टिंग ऑपरेशन को लेकर दोनों ही दलों के नेता न तुम कुछ बोलों न हम कुछ बोलें की मुद्रा में थे।
जबकि चुनाव में मुहाने पर बैठे पार्षदों की पूरी बिरादरी पर प्रश्नचिह्न लग गया है। प्रदेश अध्यक्ष खुद एमसीडी के नेता भी हैं ऐसे में उन्हें ऐसे पार्षदों पर निगरानी रखनी थी। क्योंकि चुनाव के ठीक पहले ‘पार्टी विद डिफरेंस’ का नारा बुलंद करने वाले भी स्टिंग ऑपरेशन में साफ दिख रहे हैं। कांग्र्रेस अध्यक्ष लंबे समय से गली-गली में घूमकर भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते आ रहे हैं। जबकि उनकी पार्टी की राजनीतिक तौर पर पकी हुई पूर्व मेयर और नेता इसमें शामिल हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने अपनी दोनों पार्षद जयश्री पंवार और बीना ढकोलिया के निलंबन के आदेश दिए हैं। दोनों को एक सप्ताह का समय देकर जवाब मांगा गया है। इसके बाद पार्टी इन्हें बर्खास्त करने की भी तैयारी कर रही है। हालांकि, दोनों ही पार्षद पार्टी में पावरफुल हैं। दोनों ने ही पार्षद का टिकट पाने के लिए जो समीकरण बैठाए थे उससे पार्टी पूरी तरह से परिचित है। लिहाजा, पार्टी के लिए कोई कड़ा फैसला लेना मुश्किलों भरा होगा। प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि कोई कितने बड़े कद का क्यों न हो ऐसी किसी गतिविधि में लिप्त पाया जाएगा तो पार्टी कड़ी कार्रवाई करेगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने अपने छह पार्षद सत्येश्वरी जोशी, अनिता कोली, रवि प्रकाश शर्मा, सुभाष जैन, अजीत टोकस और मंजू गुप्ता को निलंबित कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा और कांग्रेस के वास्तविक चरित्र का अंतर भी बताया है। प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी पार्टी के जीरो टॉलरेंस के फार्मूले को बेहतर बताते हुए दिल्ली सरकार पर कॉमनवेल्थ गेम्स, अनधिकृत कालोनी को प्रोविजनल सर्टिफिकेट और बिजली निजीकरण पर निशाना साधा है। प्रदेश अध्यक्ष ने लेखा परीक्षक की रिपोर्ट और शुंगलू कमेटी का हवाला देकर शायद यह बताने की कोशिश की है कि हमारी कमीज से कहीं अधिक उनकी कमीज गंदी है। हालांकि पार्षद घूस को यह कह कर जायज ठहरा रहे हैं कि उन्हें विधायक या सांसदों की तरह तनख्वाह नहीं मिलती हैं। इस हाल में वे क्या करें।












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