यूपी के फैजाबाद शहर का राजनीतिक इतिहास

हर शहर की बेसिक जरूरतें होती हैं, सड़क, बिजली और पानी और इन तीनों ही समस्याओं से यह शहर बुरी तरह से जूझता रहता है। सड़को की खराब हालत बरसात के दिनों में तो लोगों की आंखो में आंसू ले आती है। गंदगी के लिए मशहूर फैजाबाद में दो विश्वविद्यालय हैं। एक का नाम डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय है तो दूसरे का नाम नरेन्द्र देव एग्रीकल्चर और टैक्नोलॉजी है।
सोहावल, घोषीगंज, मिल्कीपुर, बीकापुर और अयोध्या फैजाबाद के निर्वाचन क्षेत्र हैं। वैसे यह शहर नवाबों की खूबसूरत इमारतों जैसे गुलाब बाड़ी, मोती महल और बहू बेगम का मकबरा के लिए भी जाना जाता है। फैजाबाद शहर चीनी, रिफाइनरियों और बीजों से तेल निकालने के लिए मिलों की एक जगह है।
यह आसपास के क्षेत्र का उत्पादन, अनाज सहित, तिलहन, कपास और तंबाकू के लिए एक बाजार केन्द्र है। ये शहर चमड़े के व्यवसाय और अमरूद की खेती के लिए भी मशहूर है। फैजाबाद में भीमराव अंबेडकर इंडरनेशनल स्पोर्टस स्टेडियम है लेकिन यहां हमेशा प्रशिक्षुओं का टोटा रहता है।
निर्मल खत्री जो कि इंडियन नेशनल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं वो इस जिले के मौजूदा सांसद है। इसके अलावा इस शहर में सपा, बसपा का भी वर्चस्व है जबकि अयोध्या भाजपा के हाथ में हैं लेकिन फिर भी यहां विकास के नाम पर शून्य काम हुआ है।
राम मंदिर निर्माण पर भाजपा, आरएएस और दूसरी पार्टियां बहस जरूर करती हैं लेकिन किसी को भी इस शहर और शहरवासियों से कोई लेना-देना नहीं है। अवध विश्वविद्यालय से हर साल पढ़ कर सैकड़ो एमसीए के छात्र निकलते हैं लेकिन विवि में आज तक कोई कैंपस सुविधा नहीं हुई है उसके पीछे कारण यह है कि किसी भी राजनेता ने यहां के युवाओं के बारे में सोचा ही नहीं। अपनी बेबसी और दुर्बलता पर आसूं बहाता सरयू नदी पर बसा यह शहर भी आज भी अपने दिन बहुरने का इंतजार कर रहा है।












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