एचआईवी पीड़ित को मासिक 1 हजार रुपये मिलेंगे

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दिल्ली ( ब्यूरो) । दिल्ली में एड्स के खतरे से जूझ रहे एचआईवी पॉजिटिव लोगों को हर महीने एक हजार रुपये सरकार देगी। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने यह घोषणा की है। साथ ही सरकार एड्स मरीजों के साथ भेदभाव रोकने के लिए कानून बनाने पर विचार कर रही है। वैसे एक सुखद खबर यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में 3.40 करोड़ लोग एचआईवी से ग्रसित हैं। समुचित परामर्श और इलाज से देश में नए मामलों में 50 प्रतिशत कमी आई है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि एक हजार रुपये से मरीजों को पौष्टिक भोजन मिल सकेगा। एक हजार रुपये महीने में क्या मिलेगा हर कोई जानता है।

बहरहाल कुछ तो मिला इस लिहाज से सरकार के इस फैसले की तारीफ की जानी चाहिए। दिल्ली की जनसंख्या का 0.2 फीसदी हिस्सा एचआईवी से ग्रस्त है। हालांकि पिछले दशक में नए मामलों में 50 फीसदी कमी आई है। वर्ष 2015 तक जीरो का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार ने लक्ष्य रखा है। वर्तमान में दिल्ली में एआरटी क्लीनिक में 34,133 लोग पंजीकृत हैं जिनमें से 9718 को इलाज की जरूरत है। इन्हें नौ एआरटी केंद्रों पर मुफ्त उपचार दिया जा रहा है। एचआईवी या एड्स के मरीजों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए सरकार जल्दी ही एक कानून ला सकती है।

वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार जल्दी ही ऐसा कानून लाएगी। इस बारे में कानून का मसौदा जल्द ही कानून मंत्रालय से मिल जाएगा। इस तरह का कानून बनाने की मांग काफी समय से उठ रही है। एचआईवी पीड़ित लोगों के प्रति उदासीनता पर भी निराशा भी जाहिर की जाती रही है। सरकार से इस मुद्दे पर कोई 'जल्दबाजी' नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ता एचआईवी या एड्स विधेयक को शीतकालीन सत्र में पारित करने की मांग कर चुके हैं। चूंकि इस कानून को लेकर कोई मतभेद नहीं है, इसलिए सरकार इसे अगले सत्र में पेश कर सकती है।

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