चीनी कंपनियों से सावधान, ढूंढते रह जाओगे

ट्रेड एंड बिजनेस ऑफ द इंडियन बिजनेस के काउंसलर के. नागराज नायडू ने बताया कि भारतीय व्यापारियों विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे उद्योगों को इंटरनेट पर चीनी फर्मों के साथ सौदेबाजी करने में सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे मामलों में यह चीनी फर्में पैसे मिलने के बाद गायब हो जाती हैं। मामला इतना गंभीर है कि केवल इस साल ही दूतावास को इससे जुड़ी धोखाधड़ी की 66 शिकायतें मिली हैं। जहां तक ऐसे मामलों में प्रतिवर्ष होने वाले घाटे की बात है तो 2009 में 78,43,000 डॉलर, 2010 में 54,01,914 डॉलर और 2011 में जनवरी से 15 जुलाई तक 18,82,119 अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 61.7 बिलियन डॉलर को भी पार कर गया है। ऐसे में कुछ अनधिकृत चीनी व्यवसायी दोनों देशों के बीच उदार व्यापारिक संबंधों का फायदा उठाना चाहते हैं।
ऐसे लोग सस्ते सामान की इंटरनेट के जरिए बिक्री का विज्ञापन देते हैं, जिससे भारतीय व्यापारी आकर्षित हो जाते हैं। नायडू ने बताया कि हमें इंटरनेट के जरिए कुछ चीनी फर्मों द्वारा भारतीय व्यापारियों से पैसे लेने की ढेरों शिकायतें मिली हैं, लेकिन जब चीनी प्राधिकरण द्वारा उन फर्मों तक पहुंचने की कोशिश की जाती है तो अधिकतर के पते गलत पाए जाते हैं। एडवायजरी में बताया गया है कि कुछ चीनी कंपनियां भारतीय व्यापारियों को अपने यहां दौरा करने के लिए आमंत्रित करती हैं। मगर रवाना होने से ऐन पहले चीनी परंपराओं और इंतजाम करने में होने वाले खर्च का हवाला देते हुए उनसे कुछ पैसों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए उपहारों का प्रबंध करने के लिए कहा जाता है। पैसे और उपहार हासिल करने के बाद यह कंपनियां ढूंढने से भी नहीं मिलती।












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