आखिरकार शोर-शराबे के बीच एमसीडी के बंटवारे पर लगी मुहर

विधानसभा द्वारा विभाजन के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दिए जाने के बाद राजधानी में उत्तरी, दक्षिणी तथा पूर्वी दिल्ली नगर निगमों के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह काम पूरा हो जाएगा। दिल्ली नगर निगम के विभाजन को लेकर बुलाए गए दिल्ली विधानसभा के दो दिवसीय सत्र के दूसरे दिन चर्चा का जवाब देते हुए सूबे की मुखिया शीला दीक्षित ने इस फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यदि हम चाहते तो दो-तीन साल पहले भी नगर निगम का बंटवारा कर सकते थे, लेकिन हम नहीं चाहते थे कि हम पर ये आरोप लगाए जाएं कि चूंकि निगम में भाजपा सत्ता में थी, इसलिए हमने इसका विभाजन कर दिया।
शीला दीक्षित ने कहा कि यह सही है कि तीन नगर निगमों के बीच समन्वय के लिए एक स्थानीय निकाय निदेशालय बनेगा, लेकिन यह तीनों निगमों के कार्यों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धर्मराजन की अगुवाई वाली प्रशासनिक समिति नया एमसीडी एक्ट बना रही है। इसकी रिपोर्ट मार्च के आखिर तक आ जाएगी और केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद इसे अमल में लाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने फिर कहा कि उनके हाथ में कोई जादू की छड़ी नहीं है कि विभाजन से संबंधित तमाम सवालों को चुटकी में हल कर दे। इसमें छह महीने से साल भर तक का वक्त लगेगा।
इससे पहले विभाजन पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से नगर निगम के विभाजन के पक्ष में रही है, लेकिन दिल्ली सरकार ने जो प्रस्ताव पेश किया है वह जल्दबाजी में लाया गया प्रस्ताव है। बंटवारा केवल बंटवारे के लिए किया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाए जाने की मांग करते हुए कहा कि जब केंद्र में राजग का शासन था तब मुख्यमंत्री अपने विधायकों को लेकर मार्च करती हुई संसद गई थीं। मांग थी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना, लेकिन अब उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है।












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