देश में क्रांति ला सकती है परमाणु ऊर्जा: वेणुगोपाल

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भुवनेश्वर। इंडियन एसोसिएशन आफ न्यूक्लियर केमिस्ट्स एंड एलाइड साइंटिस्ट (आईएएनसीएएस) के अध्यक्ष वी वेणुगोपाल ने कहा है कि यदि भारत को वर्ष 2032 तक आठ लाख मेगावाट की अपनी भविष्य की उर्जा जरुरत को पूरा करना है तो लोगों को परमाणु उर्जा के बारे में अपनी धारणा को बदलना होगा।

वेणुगोपाल ने कल यहां एक संगोष्ठि को संबोधित करते हुए कहा कि लोग इस तथ्य से सहमत हैं कि संकट हैं लेकिन इसे दूर करने के तरीके को लेकर उनके अलग अलग विचार हैं। उन्होंने तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईटीईआर) की ओर से रेडियोकेमेस्टी एंड एप्लीकेशन आफ रेडियोआइसोटोप्स विषयक संगोष्ठी में कहा कि हालांकि सभी इस बात पर सहमत हैं कि उर्जा उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता है लेकिन परमाणु संसाधनों के दोहन के मुद्दे पर उनमें आशंकाएं हैं।

उनमें इस बात की आशंका है कि यह सुरक्षित नहीं हो सकता है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में रेडियोकेमेस्टी एंड आइसोटोप समूह के पूर्व निदेशक वेणुगोपाल ने कहा कि देश में परमाणु उर्जा संयंत्रो के सुरक्षा पहलुओं पर चिंताओं को दूर करने की जरूरत है क्योंकि उर्जा के सभी संसाधनों का दोहन महत्वपूर्ण है।

भारत का एक बहुत बड़ा वर्ग जोकि परमाणु उर्जा को आज भी घातक ही समझता है लेकिन सच्‍चाई यह है कि यही परमाणु बिजली उत्‍पादन का सबसे बड़ा जरिया है। विश्‍व में आज सबसे ज्‍यादा बिजली उत्‍पादन परमाणु उर्जा से ही हो रही है। तो सवा अरब आबादी वाले इस देश में इसका विरोध्‍ा क्‍यो जहां इसकी सबसे ज्‍यादा आवश्‍यकता है।

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