माशूका को बचाने के चक्कर में मारा गया माओवादी नेता किशनजी

प्राप्त जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में नक्सलियों के खिलाफ जब नक्सल विरोधी कोबरा बटालियन और पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया तो किशन जी वहां से भागकर असम आ गया था। किशन जी को भी इस बात का पता था कि सुरक्षा बल जामबनी जंगल में उसके लिये जाल बिछा रखे हैं लेकिन सुचित्रा के प्यार में पागल वह इस बात की परवाह किए बगैर जामबनी जंगल पहुंच गया।
मालूम हो कि मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों को एक बैग मिला है जिसमें कुछ सामान और चिट्ठिया मिली हैं। चिट्ठी में सुचित्रा और किशन जी के बीच प्यार की बातों का जिक्र है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुरक्षा बलों को इस बात की जानकारी पहले से ही थी। भैरव वाहिनी (माओवादी प्रतिरोध कमेटी) माओवादियों के खास वन और हर गतिविधी पर नजर रखे हुए थी। सूत्रों की मानें तो सुचित्रा पहले जामबनी पहुंची थी उसके बाद किशनजी वहां गया। दोनों के जंगल पहुंचने के बाद सुरक्षाबलों ने दो दिनों तक घेराबंदी की फिर धावा बोला। सूत्रों का कहना है कि इस बीच किशनजी चाहता तो भाग सकता था मगर वह अपने प्यार को बचाने के चक्कर में भाग नहीं पाया।
सुचित्रा के सफर पर एक नजर
सुचित्रा ने अपना सफर एक रसोइया के रूप में शुरु किया था। वह माओवादियों के बीच खाने बनाने वाली के रूप में आई थी। कुछ दिन बाद ही उसने माओवादी शशधर से शादी कर ली थी। शादी के बाद ही शशधर और सुचित्रा ने पीपुल्स वॉर ग्रुप ज्वाइन कर लिया। देखते ही देखते सुचित्रा ने मोटरासाइकिल और हथियार चलाने में महारत हासिल कर ली। उसने कम समय में वो कर दिखाया जो हार्डकोर माओवादी भी नहीं कर पा रहे थे। सुचित्रा ने 2009 में संकराइल थाने पर हमला बोलकर उसने थाना प्रभारी को उठा लिया।
सिल्दा कैम्प पर हमला कर ईएफआर जवानों को मौत के घाट उतारा और असलहे लूटे। अपने मजबूत नेटवर्क के कारण सुचित्रा किशनजी के काफी करीब आ गई। ये करीबी कुछ ही दिनों में प्यार में बदल गई। बताया ये भी जा रहा है कि वो गर्भवती है। फिलहाल वो सुरक्षा बलों के पकड़ से बाहर है।












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