किरण बेदी पर कोर्ट का फैसला गलत और बेबुनियाद: केजरीवाल

उल्लेखनीय है कि किरण बेदी पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश अधिवक्ता देविन्दर सिंह चौहान की शिकायत पर कोर्ट ने सुनाया है। चौहान की शिकायत याचिका में कहा गया है कि पूर्व महिला आईपीएस किरण बेदी ने अपने ट्रस्ट इंडिया विजन फाउंडेशन के अंदर 'मेरी पुलिस' नाम से बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस संगठनों के अधिकारियों के लिए नि:शुल्क कम्प्यूटर ट्रेंनिग कार्यक्रम चलाया था। मगर उन्होंने ट्रेनिंग के बदले में प्रत्येक व्यक्ति से 15-15 हजार रुपये वसूले थे।
आरोप के अनुसार, किरण ने वेदांता के साथ दान समझौता किया। इसके तहत छह हजार वेदांता की ओर से उनके ट्रस्टों (इंडिया विजन फाउंडेशन और नवज्योति फाउंडेशन) को इस झूठे आधार पर दिए गए कि किरण बेदी ने कथित केंद्रों की गतिविधियां चलाने के लिए भूमि और बिजली की व्यवस्था की है। जबकि, यह व्यवस्था पुलिस संगठनों की ओर से की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार बेदी ने एक कम्प्यूटर 50 हजार रुपये में खरीदा दिखाया, जबकि इसकी कीमत 20 हजार रुपये थी। साथ ही किरण बेदी ने अपने रिश्तेदारों को तवज्जों दी थी।
सोमवार को इस मामले में सफाई देते हुये टीम अन्ना के अरविंद केजरीवाल ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने एक बार फिर मेल भेज कर किरण बेदी के संगठन को और दान देने की बात कही है। ऐसे में यह बात पूरी तरह से बेबुनियाद है कि माइक्रोसाफ्ट के साथ किरण बेदी के एनजीओ ने कोई धोखाधड़ी की है। इसी तरह वेदांता ने भी किरण बेदी के एनजीओ को समर्थन देने की बात कही है। केजरीवाल ने कहा कि किरण बेदी के खिलाफ धोखाधड़ी के कोई सबूत नहीं हैं और किरण बेदी ने कोई गलत काम नहीं किया है।












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