किशनजी की मुठभेड़ राजनीतिक हत्या: राव

किशनजी की मुठभेड़ राजनीतिक हत्या थी। आंध्र प्रदेश सिविल लिबर्टीज कमिटी के प्रमुख सदस्य राव ने कहा कि माओवादी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किए जाने की मांग की। किशनजी (58) की 24 नवंबर को पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में मौत हो गयी थी।
नक्सल नेता का आज उनके पैतृक गांव पेड्डापल्ली में अंतिम संस्कार होगा। सिविल लिबर्टीज कमिटी के नेता कल्याण राव ने मुठभेड़ के लिए प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया। किशनजी का शव आज तड़के कोलकाता से पेड्डापल्ली लाया गया और उसे उनके आवास पर रखा गया।
किशनजी को छह बार गोली मारी गयी: पोस्टमार्टम रिपोर्ट
सुरक्षा बलों के हाथों मारे गये शीर्ष माओवादी नेता किशनजी को पश्चिमी मिदनापुर में मुठभेड़ के दौरान छह बार गोली मारी गयी और उसके शरीर पर छर्रे के दो घाव थे। उसके शव का पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने बताया कि उसकी ठुड्डी, माथे, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में गोली लगी थी। उन्होंने बताया कि एक गोली करीब 50 मीटर दूरी से दागी गयी थी।
फारेन्सिक विशेषज्ञों के एक दल ने पाया कि उसके हाथों में कुछ बारूद पाया गया जिससे लगता है कि बृहस्पतिवार को बुरीसोल के जंगल में मुठभेड़ के दौरान वह अपने बचाव के लिये हथियार का इस्तेमाल कर रहा था। किशनजी के शव की शिनाख्त उसकी भतीजी दीपा राव ने मिदनापुर मेडिकल कालेज और अस्पताल के मुर्दाघर में की। उसके शव को आन्ध्र प्रदेश में उसके पैतृक निवास भेजने से पहले वहां से कोलकाता भेजा गया।












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