घपला करने वाले बिजली अधिकारी निलंबित

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फरीदाबाद। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण निगम को हुए वित्तीय नुकसान के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 11 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। निगम के प्रवक्ता ने बताया कि एक ठेकेदार द्वारा निगम के प्रबन्ध निदेशक मोहम्मद शाईन को अधिकारियों द्वारा हेराफेरी व बेईमानी की शिकायत की गई थी। जिस पर निगम के प्रबन्ध निदेशक ने जांच के लिए एक समिति का गठन किया जिसमें आर.के.सोढ़ा महाप्रबन्धक, एस.एस.यादव उपमहाप्रबन्धक तथा दो लेखाविंग के अधिकारी शामिल थे।

समिति ने जांच में पाया कि निगम और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत चलती रही है जिसके परिणामस्वरूप निगम को नुकसान पहुंचाते हुए पुलिंग करके कार्यों के लिए निविदाएं दी, भण्डारों से सामान निकलवाकर उसका अपयोजन किया गया, गलत नाप किए गए, गलत प्रमाणिकरण किया गया और रुकी हुई अदायगियों को जारी करने के लिए अवांछित निर्देश दिए गए। समिति ने अपनी रिपोर्ट कल निगम के प्रबन्ध निदेशक मोहम्मद शाईन को सौंपी। श्री शाईन ने रिपोर्ट में पाया कि अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत रही है व अधिकारियों ने जानबूझकर निगम को घाटा पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि यह अति आश्चर्यजनक है कि निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने कनिष्ठ अधिकारियों के ऐसे कुकृत्य करने से रोकने की बजाए खुद बेईमानी के कृत्यों में शामिल हुए।

इन्हें किया गया निलंबित

शाईन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आज 11 अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश कर दिए। निलंबित किए गए अधिकारियों में विपिन चंदा, महाप्रबन्धक निर्माण परिमण्डल फरीदाबाद, टी.सी.कंसल उपमहाप्रबन्धक महेन्द्रगढ़, एम.एस.रोहिल्ला उपमहाप्रबन्धक मैटीरियल मैनेजमैंट, वी.एस.शर्मा सहायक अभियंता, हनुमान दत्त सहायक अभियंता, बदन सिंह कनिष्ठ अभियंता, ए.के.सिंगला कनिष्ठ अभियंता, मनीष वधवा कनिष्ठ अभियंता, राजेश मुदगिल कनिष्ठ अभियंता, मांगे राम डिवीजनल अकाऊटैंट व विक्रम सिंह एस.एस.ए. शामिल हैं। इन अधिकारियों के विरूद्ध आरोप-पत्र तैयार किए जा रहे हैं व जल्द ही जारी कर दिए जाएंगे। इनमें से विपिन चंदा, वी.एस.शर्मा व बदन सिंह को पहले ही रिश्वत व बेईमानी के आरोप में निलंबित किया हुआ है।

शिकायत करने वाला ठेकेदार भी मिलीभगत में शामिल

श्री शाईन ने समिति की रिपोर्ट में पाया कि जिस ठेकेदार फर्म ने इस संबंध में शिकायत की थी वह स्वयं भी इस मिलीभगत में शामिल थी। जब तक इसके गलत कार्यों को रोका नहीं गया या सूचना नहीं दी गई तब तक इसके लिए सब ठीक था। ठेकेदार ने न केवल निर्माण की साईट पर हेराफेरी की बल्कि ऐसे सामान के फर्जी बिल भी बनाए जिसकी आपूर्ति कभी की ही नहीं गई थी। वह निगम अधिकारियों के साथ एक अपराधिक मिलीभगत और निगम को वित्तीय नुकसान पहुंचाने में शामिल था। प्रबन्ध निदेशक ने पाया कि ठेकेदार ने प्रणाली को तोडऩे के लिए गहरी साजिश की और लोभी प्रवृत्ति के अधिकारियों का पूरा लाभ उठाया। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के विरूद्ध भी उचित कार्रवाई की जाएगी। चीफ इलैक्ट्रिकल इंस्पेक्टर के कार्यकारी अभियंता के विरूद्ध भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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