मिशन एडमिशन शुरू होने से पहले अभिभावक टेंशन में

दिल्ली के शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह ने हाल ही में संकेत दिया था कि दिशानिर्देश में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो अभिभावकों और विशेषज्ञों को लगता है कि उन्हें इस साल भी पिछले साल जैसी ही समस्या का सामना करना पड़ेगा। संभावना है कि दिशानिर्देश इस माह के अंत तक अधिसूचित किए जाएंगे। पिछले साल, दिशानिर्देशों में कहा गया था कि स्कूल प्रवेश के लिए अपने मानक खुद तय कर सकते हैं। इसमें अंक प्रणाली शामिल थी जिसके तहत एक ही स्कूल में सहोदर भाई या बहन के पढ़ने, स्कूल के भूतपूर्व छात्रा की संतान होने, पहली संतान लड़की होने और स्कूल के समीप घर होने आदि के लिए छात्रा को अंक दिए जाते थे।
उन्होंने कहा यदि शिक्षा निदेशालय दिशानिर्देशों में कोई बदलाव नहीं करता तो अभिभावकों को पिछले साल जैसी समस्या का ही सामना करना पड़ेगा। वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट एडमिशननर्सरी डाट काम के संस्थापक सुमीत वोहरा ने कहा ऐसे दिशानिर्देशों का मतलब उन अभिभावकों को फिर पिछले साल जैसी समस्या का सामना करना होगा जिनके बच्चे एक ही स्कूल में सहोदर भाई या बहन के पढ़ने, स्कूल के भूतपूर्व छात्रा की संतान होने, पहली संतान लड़की होने और स्कूल के समीप घर होने, प्रबंधन या ईडब्ल्यूएस कोटे के अंतर्गत नहीं आते। पिछले साल अपने बेटे को प्रवेश दिलाने में नाकाम रहीं आरती जैन ने कहा मुझे आशंका है कि अगर इस साल भी प्रक्रिया नहीं बदली तो शायद मेरे बेटे को फिर से प्रवेश नहीं मिल पायेगा।
कनाट प्लेस निवासी आरती ने कहा मेरा बेटा एक ही स्कूल में सहोदर भाई या बहन के पढ़ने, स्कूल के भूतपूर्व छात्रा की संतान होने, पहली संतान लड़की होने की श्रेणी में नहीं आता। अगर स्कूल इन श्रेणियों में अधिक अंक देने जा रहे हैं तो मेरे बेटे के प्रवेश में बहुत मुश्किल होगी। मैं चाहती हूं कि इस बार कोई बदलाव किया जाना चाहिए। इन्हीं दिशानिर्देशों के चलते मानसी मल्होत्रा पिछले साल अपने बेटे को प्रवेश नहीं दिला पाई थीं। उन्होंने कहा कि जब तक अंक प्रणाली को व्यवहारिक तरीके से निर्धारित नहीं किया जाएगा, तब तक समस्या वहीं बनी रहेगी और अभिभावक परेशान होते रहेंगे।
बहरहाल, मयूर विहार स्थित ऐल्कान इंटरनेशनल स्कूल के प्राचार्य अशोक पांडे की राय अलग है। उन्होंने कहा कि दिशानिर्देशों की यह श्रेणियां पूरी प्रवेश प्रक्रिया का आधार हैं। वोहरा ने कहा लापरवाहीपूर्ण इस अंक प्रणाली की वजह से हताशा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा मुभुो नहीं लगता कि सरकार इन श्रेणियों में बदलाव की कोशिश करेगी। बच्चे के प्रवेश की उम्र सीमा चार साल करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा यह व्यवहारिक लगता है। पूसा रोड स्थित स्पि्रंगडेल्स स्कूल की प्राचार्य अमीता एम वट्टल भी मानती हैं कि प्रवेश की न्यूनतम उम्र बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा निश्चित रूप से आयु एक कारक है जिस पर गौर करने की जरूरत है।
वर्तमान में नर्सरी के लिए तय आयु सीमा तीन साल है लेकिन इस उम्र के कई बच्चों को यह भी पता नहीं होता कि उन्हें टायलट जाने की जरूरत पड़ने पर बताना चाहिए। एक गैर सरकारी संगठन सोशल ज्यूरिस्ट ने हाल ही में दिल्ली में एक जनहित याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि नर्सरी में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। अदालत ने इस याचिका पर दिल्ली सरकार से 23 नवंबर तक जवाब देने को कहा है। गैर सरकारी संगठन की ओर से याचिका दाखिल करने वाले अशोक अग्रवाल ने कहा सुनवाई के नतीजे को लेकर हमें बड़ी उम्मीद है। यदि यह हमारे पक्ष में आया तो हजारों नन्हें बच्चे नर्सरी में प्रवेश की सालाना रेस से बच जाएंगे।












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