धरा गया घाटकोपर विस्फोट में शामिल आतंकी तौफीक

Ghatkopar blast accused arrested in Noida
दिल्ली (ब्यूरो)। यूपी एटीएस और तमिलनाडु पुलिस ने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे तौफीक उर्फ अब्दुल्ला को नोएडा के मोरना से धर दबोचा। लश्कर का आतंकवादी तौफीक 2 दिसंबर 2002 को मुंबई के घाटकोपर में हुए ब्लास्ट में शामिल था। वह कई अन्य मामलों में भी वांछित है और यहां से नेपाल के रास्ते दुबई भागने की फिराक में था। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल में जुट गई हैं कि हर नई जगह नाम बदलकर रहने वाला तौफीक नोएडा अथवा एनसीआर में किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में तो नहीं था। तौफीक के लश्कर-ए-तैयबा, मुसलिम डिफेंस फोर्स और अन्य आतंकी संगठनों से
संबंध रहे हैं।

एटीएस अधिकारी आरएन मिश्र ने बताया कि उसे मोरना बस अड्डे से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से किसी प्रकार की विस्फोटक सामग्री नहीं मिली है। वह तमिलनाडु के तंजौर का रहने वाला है और सऊदी अरब और बांग्लादेश को अपना ठिकाना बना चुका है। तमिलनाडु में उसके खिलाफ विध्वंसकारी गतिविधियों में शामिल होने के मामले दर्ज हैं। वहां की पुलिस ने 2008 में उसे गिरफ्तार किया था। जेल से निकलने के बाद वह बांग्लादेश भाग गया और इसी साल कोलकाता होते हुए गोरखपुर, बहराइच और लखनऊ पहुंचा। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) सुबेश कुमार सिंह ने लखनऊ में बताया कि तौफीक मुंबई में इमरान अजीज उर्फ अबू सलाम के घर पर भी ठहरा था। अबू हैदराबाद ब्लास्ट मामले में आरोपी था और नवंबर 2002 में मुठभेड़ में मारा गया था।

नोएडा से पकड़े गए तौफीक की नेपाल में पासपोर्ट बनवाकर दुबई भागने की योजना थी। पासपोर्ट के लिए तौफीक ने नेपाल में जुगाड़ भी भिड़ा रखा था लेकिन नोएडा में गिरफ्तार होने के बाद उसकी योजना धरी की धरी रह गई। एटीएस आर.एन.मिश्र ने बताया कि तौफीक ने तमिलनाडु में 2000 में एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी, जिसके बाद वह सऊदी अरब भाग गया था। डेढ़ साल बाद वीजा की अवधि खत्म होने के चलते उसे सऊदी अरब छोड़ना पड़ा। विस्फोटक पदार्थ सप्लाई करने के आरोप में 2002 में तौफीक के खिलाफ तमिलनाडु के कोडनगेयूर थाने में मामला दर्ज हुआ था। आर.एन. मिश्र ने बताया कि 2002 में हैदराबाद के साईं मंदिर में हुए विस्फोट के बाद मुठभेड़ में मारे गए अबू को अपने घर पर छिपाने का भी तौफीक आरोपी रह चुका है।

2 दिसंबर 2002 में घाटकोपर की बेस्ट बस में विस्फोट के मामले के आरोपी तौफीक को 2006 में बरी कर दिया गया था, जबकि तमिलनाडु में विस्फोटक सामग्री सप्लाई के मामले में उसे 2007 में उसे बेल मिल गई थी। 2008 में पेशी के लिए तौफीक तमिलनाडु कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ, जिसकी वजह से कोर्ट ने उसके खिलाफ वारंट जारी कर दिया। भागने के बाद बांग्लादेश, कोलकाता, लखनऊ, नेपाल समेत कई जगहों को तौफीक ने अपना ठिकाना बनाया। बांग्लादेश की नागरिकता पाने के लिए तौफीक ने बांग्लादेशी युवती सलमा से शादी कर ली, जिससे उसके एक बच्चा भी है। इससे पहले तौफीक की पहली शादी तमिलनाडु में भी हो चुकी है। तौफीक हाई स्कूल फेल है, जिसके बाद से ही वह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गया था। 8 फरवरी 1976 को जन्में तौफीक के दो भाई हैं, जो विदेश में नौकरी कर रहे हैं। इनके अलावा तीन बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। तौफीक के पिता शाह उल हमीर का इंतकाल हो चुका है जबकि मां तमिलनाडु में रहती है।

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