सिरसा : युवा उत्सव के दूसरे चरण का शुभारंभ
इस अवसर पर डॉ. चन्द्र त्रिखा ने कहा कि साहित्य व कला का जीवन में बड़ा योगदान है। कविता में शब्द का बड़ा महत्व होता है, शब्द ब्रह्म होता है। शब्द ही किसी बात को बनाते और बिगाड़ते हैं, इसमें संदेश देने की शक्ति व देश की दशा को व्यक्त करने की सामथ्र्य होती है, लेकिन जब शब्द अपनी सामथ्र्य खो बैठता है तो वह मौन होता है।
इस कार्यक्रम में जेसीडी विद्यापीठ की प्रबन्ध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियां जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है, इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में जीवन को सही ढंग से जीने के लिए साहित्य का बहुत बड़ा योगदान होता है। उन्होंने कहा कि साहित्य ही समाज का आईना होता है तथा साहित्यिक गतिविधियों में लीन रहने वाले व्यक्तियों में अपराधवृत्ति नहीं आती।
सुविख्यात चित्रकार आर.एम. सिंह ने कहा कि प्रकृति अपने आप में एक भव्य और विराट चित्र है। रंगों का जो मिश्रण कुदरत के नजारों में है, वह अन्यत्र नहीं। इस तरह की कार्यशालाओं की सराहना करते हुए आर.एम. सिंह ने कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारते हैं। इस अवसर पर फ्रांस की चित्रकार एवं कवयित्री मैडम मॉर्टिन ने फे्रंच भाषा में कहा कि मैं भारतीय संस्कृति से बहुत प्रभावित हूं और यहां की संस्कृति व सभ्यता से रूबरू होने के लिए दूसरी बार भारत में आई हूं।
चित्रकला व पोस्टर मेकिंग प्रदर्शनी भी आयोजित की गई
इस युवा महोत्सव में डॉ. मनोज कुमार व डॉ. माधुरी मैहता की चित्रकला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया गया। इस कार्यक्रम में साहित्यिक गतिविधियों के प्रथम सत्र में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष कमलेश भारती, प्रभाव ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट नई दिल्ली के एचओडी मुनीष राज शर्मा व विकास हाई स्कूल के निदेशक विशाल वत्स ने साहित्यिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की, वहीं ललित कला कार्यशाला में राजेश जांगड़ा ने कोलॉज, डॉ. मनोज छाबड़ा ने पोस्टर मेकिंग, संदीप जोशी ने कार्टूनिंग, भीम सिंह ने क्ले-मॉडलिंग, चित्रकार शंकर शर्मा ने रंगोली के बारे में प्रतिभागियों को बारिकी से समझाया।
डॉ. मनोज छाबड़ा ने पोस्टर मेकिंग के बारे में कहा कि बड़े-बड़े आंदोलनों के पीछे पोस्टर बड़ी भूमिका निभाते हैं, वे अपने आप में बहुत बड़ा संदेशवाहक होते हैं। पुस्तक की बजाए पोस्टर को एक साथ सैकड़ों लोग देख सकते हैं। आजकल कविता पोस्टर का चलन है, खासकर नागार्जुन, केदारनाथ सिंह, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविताओं के पोस्टर काफी चर्चित हुए हैं।
पोस्टर सामाजिक सोद्देश्यता व क्रांति के वाहक होते हैं। कार्यक्रम के संयोजक व जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य ने आए हुए अतिथियों एवं साहित्यकारों, चित्रकारों व अन्य गणमान्य लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो जिम्मेवारी सौंपी गई हैं, उस पर वे खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय के रीडर डॉ. राजेन्द्र कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आने वाले लगभग 30 कॉलेजों ने रजिस्ट्रेशन करवा ली है और लगभग 300 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. दीप्ति धर्मानी, डॉ. एस.के. गेहलावत, डॉ. शमशेर सिंह, साहित्यकार पूरन मुद्गल, लाजपुष्प, डॉ. आर.एस. टाडा व जेसीडी विद्यापीठ के सभी कॉलेजों के प्राचार्य व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।













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