चुनाव जीते तो सांसदी छोड़, सीएम बनेंगे मुलायम सिंह

अखिलेश यादव के इस बयान को पार्टी कार्यकर्ता भी नये तरीके से देख रहे हैं क्योंकि मुलायम सिंह द्वारा अखिलेश को चुनावी कमान सौंपने के बाद यह समझा जा रहा था कि अखिलेश ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। मुलायम सिंह यादव भी स्वयं के मुख्यमंत्री बनने की बात को कई बार टाल चुके हैं जिससे इस बात को बल मिल रहा था कि अखिलेश यादव को यह जिम्मा सौंपा जायेगा।
क्रांति रथयात्रा के जरिए अखिलेश अब तक प्रदेश व केन्द्र सरकार पर निशाना साध रहे थे वहीं यात्रा के सातवें चरण में उन्होंने यह विश्वास जताया कि प्रदेश में सपा की ही सरकार बनेगी। मुलायम ने कहा कि राज्य की वर्तमान बसपा सरकार से राज्य की जनता बुरी तरह नाराज है। चुनाव में यदि सपा को बहुमत मिलता है तो जीते सदस्य मुलायम सिंह यादव का ही चुनाव करेंगे। कांग्रेस के साथ तालमेल की सम्भावनाओं से इंकार करते हुए उन्होंनें कहा कि देश और राज्य में महंगाई के लिये कांग्रेस और बसपा दोनों जिम्मेदार है। दोनों की गलत आर्थिक नीतियों के कारण देश और राज्य में महंगाई बढ़ रही है। किसानों की बदहाल के लिए उन्होंने दोनों की सरकार को दोषी बताया।
उन्होंनें कहा कि किसानों की स्थिति खराब है। किसान खाद, पानी, बिजली के लिये तरस रहा है। किसानों को धान और गन्ने का समर्थन मूल्य कम मिल रहा है। राज्य सरकार धान का समर्थन मूल्य सात सौ रूपया प्रति क्विंटल दे रही है, इससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। उन्होंनें समर्थन मूल्य एक हजार छह सौ रूपया प्रति क्विंटल करने की मांग की। 14 नवम्बर को इलाहाबाद के झूंसी में सपा के कार्यकर्ता को लात घूंसे से पीटने पर केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह की आलोचना की और कहा कि देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मामला है जब शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों पर कानून को हाथ में लेकर मंत्री ने हमला किया हो।












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