किंगफिशर की अर्जी पर सरकार आईओसी से करेगी बात

kingfisher
नई दिल्ली। सरकार विमान इधन सधे आयात करने की निजी क्षेत्र की एयरलाइन किंगफिशर एयरलाईन्स की अर्जी पर कोई निर्णय लेने से पहले तेल का खुदरा कारोबार करने वाली प्रमुख सरकारी कंपनी इंडिया आयल कार्पोरेशन से बातचीत करेगी। किंगफिशर ने इस समय वित्तीय संकट में है और इससे उबरने के उपायों के तहत वह विमान ईंधन सीधे आयात करने की अनुमति चाहती है।

उसका मानना है कि ऐसा करने से उसे ईंधन खर्च में बचत होगी। विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) अनूप पुजारी ने पीटीआई से कहा कि हम आईओसी से बात करेंगे। उन्होंने सिफारिश करेंगे हालांकि उनकी सिफारिश हमारे लिए बाध्यता नहीं है। विदेश व्यापार नीति के मुताबिक सिर्फ आईओसी जैसी सरकारी कंपनियों को ही जेट इधन आयात करने की अनुमति है।

हालांकि डीजीएफटी के पास मुश्किल घड़ी में ऐसे उत्पादों का आयात करने की अनुमति किसी अन्य व्यक्ति देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि डीजीएफटी के पास किंगफिशर की जेट इधन के सीधे आयात करने संबंधी आवेदन नहीं मिला है। किंगफिशर ने 15 नवंबर को कहा था कि उसने डीजीएफटी को आवेदन भेजा है। यह पूछने पर कि क्या सरकार परमिट नीति में लचीलापन ला सकती है डीजीएफटी ने कहा कि विदेशी व्यापार के नियम के तहत हम एेसा कर सकते हैं लेकिन आवेदक को यह साबित करना पड़ेगा कि वह वास्तविक तौर पर मुश्किल में है।

हालांकि पुजारी ने आगाह किया कि इस आधार पर दूसरे भी इसी तरह की छूट की मांग करेंगे। देश की अन्य विमान कंपनियां किंगफिशर की तरह संकट के संकट में न हों पर की स्थिति में न हों लेकिन ज्यादातर विमानन कंपनियों की वित्तीय हालत खस्ता है। किंगफिशर को 30 सितंबर को समाप्त तिमाही के दौरान 468.66 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। उसके उपर 6,000 करोड़ रुपए का रिण है।

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