अयोध्या में यात्राओं का समापन कर भाजपा ने दोहराया इतिहास

भाजपा ने अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन चरम पर रहने के समय वर्ष 1991 में यहीं से चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। राम मंदिर को मुद्दा बना भाजपा ने 1991 में कल्याण सिंह के नेतृत्व में पहली बार अपनी सरकार बनायी थी। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह और उपाध्यक्ष कलराज मिश्र के नेतृत्व में काशी और मथुरा से शुरु की गयी दोनों यात्राओं के अयोध्या में ही समापन किये जाने के पीछे पार्टी यह संदेश देना चाह रही है कि वह अपने पुराने मुद्दों पर पूर्ववत कायम है।
यात्राओं के अयोध्या में समापन पर भाजपर नेताओं ने हालांकि संस्कृति व परम्परा का हवाला दिया लेकिन उसके पीछे छिपी राम मंदिर मुद्दे को भुनाने की नीयत साफ दिखी। अयोध्या में यात्रा का समापन करते हुए इन दोनों नेताओं ने कहा कि भाजपा अयोध्या में मंदिर निर्माण की अपनी पुरानी राय पर आज भी कायम है।
इन नेताओं ने दोहराया कि जब भी भाजपा मतबूत स्थिति में आयेगी तो संसद में कानून बनाकर सोमनाथ की तर्ज पर मंदिर निर्माण करवाया जाएगा। वहीं भाजपा के इस कदम पर राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि भाजपा ने यात्राओं का अयोध्या में समापन करवाकर फिर एक चुनावी दांव खेला है। यात्राओं का यहां समापन कराकर उसने 1991 की तरह ..राम.. को केन्द्र में रखा है।
इस दौरान कलराज मिश्र ने कहा कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण भाजपा का स्थायी मुद्दा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ विशेष पूर्णपीठ ने भी अपने 30 सितम्बर 2010 के आदेश में विवादित स्थल को राम जन्मभूमि माना है। भाजपा नेताओं का दावा है कि उनकी जनस्वाभिमान यात्राएं पूरी तरह सफल रहीं।












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