यूपी विभाजन के लिए पुनर्गठन प्रस्ताव जरूरी नहीं: मायावती

मायावती ने कहा कि नये राज्य के गठन के लिये संविधान के मुताबिक कोई विधेयक लाने का अधिकार केन्द्र सरकार के पास है। उन्होंनें कहा कि उत्तर प्रदेश को चार हिस्से बुंदेलखंड, पूर्वांचल, अवध प्रान्त और पश्चिम प्रदेश में विभाजित करने का मंत्रिमंडल में पारित किया प्रस्ताव केन्द्र सरकार पर दबाब बनाने के लिये था। दबाब को और ज्यादा वजन देने के लिये विधानमंडल के 21 नवम्बर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में पारित कर उसे केन्द्र सरकार को भेजा जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह जिम्मा कांग्रेस पर है। कांग्रेस छोटे राज्यों की विरोधी रही है इसीलिये राज्य पुनर्गठन आयोग के गठन की बात कह कर बात को टाल रही है। वहीं उन्होंनें कहा कि केन्द्र सरकार यदि राज्य का विकास चाहती है तो संवैधानिक प्रक्रिया अपना कर संसद में अलग राज्य का विधेयक पारित करा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का यह कहना पूरी तरह से गलत है कि राज्य का पुनर्गठन करने के पहले संबंधित विधानसभा से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है। राज्य के पुनगर्ठन के लिये राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की कोई जरूरत नहीं है। कांग्रेस नेताओं को ऐसी बात कहने के पहले उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के लिये केन्द्र सरकार की ओर से अपनायी गयी प्रक्रिया का संज्ञान लेना चाहिये जिसके तहत उत्तरांचल अलग राज्य का गठन किया गया।
मायावती ने विपक्षियों के उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उनके इस निर्णय को चुनावी शिगूफा बताया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह आरोप पूरी तरह से गलत और भ्रामक है कि राज्य के पुनर्गठन का लिया गया निर्णय विधानसभा के चुनाव को देख कर लिया गया है। उन्होंनें राज्य के पुनर्गठन को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के रवैये की निंदा की और कहा कि दोनों पार्टियां छोटे राज्यों का विरोध करती रही हैं।












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