निकाय चुनाव पर बसपा सरकार को हाईकोर्ट की फटकार

सरकार को शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के मामले में यह एक बड़ा झटका है। सरकार ने निकायों का कार्यकाल खत्म होने पर चुनाव करवाने की बजाय यहां प्रशासकों की नियुक्ति का निर्णय लिया था। विरोधों के बावजूद सरकार ने अदालत में चुनाव न करवाने के तमाम तर्क दिये। सरकार के निर्णय के विरूद्घ हाईकोर्ट ने किसी भी कीमत छह सप्ताह में निकाय चुनाव कराने को कहा है। इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि छह हफ्ते में चुनाव प्रकिया पूरी हो जानी चाहिए।
इसके लिए 31 अक्टूबर तक नोटिफिकेशन जारी हो और 2011 की जनगणना के आधार पर मतदाता सूची तैयार हो। राज्य सरकार ने 19 अक्टूबर के इस फैसले को चुनौती दी थी। राज्य सरकार ने कहा था कि जनगणना की प्रक्रिया जारी रहने से आंकड़े उपलब्ध होना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि 2001 की जनगणना के आधार पर भी चुनाव हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि सरकार बहानेबाजी न करे चुनाव कराने के लिए आंकडे बाधक नहीं है।
कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि नोटिफिकेशन जल्द जारी हो और चुनाव छह हफ्ते में हो जाए। दूसरी ओर हाईकोर्ट लखनऊ पीठ ने अन्य याचिकाओं का निपटारा करते हुए निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के निर्णय के परिपेक्ष्य में सारी स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा में यह पाया गया कि हाईकोर्ट ने जो समय दिया है, उसी के भीतर चुनाव कराये जा सकते हैं। उधर हाईकोर्ट के फैसले से विपक्षी दल काफी खुश हैं। उनका कहना है कि मायावती सरकार इस चुनाव में देरी कर रही है, क्योंकि उसे बसपा के बुरे प्रदर्शन का खामियाजा अगले साल विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।












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