आम जनता को जरूरी दवाएं कम कीमत पर मिलेंगी

Essential medicines at affordable prices
दिल्ली (ब्यूरो) । सरकार जरूरी दवाएं कम कीमत पर आम जनता को उपलब्ध कराएगी। यह हलफनामा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया है। इससे कीमत के कारण इलाज से वंचित लोगों को बहुत राहत मिलेगी। हालांकि एक समय यह व्यवस्था थी लेकिन धीरे -धीरे स्थिति पलट गई थी। स्वास्थ्य और परिवार मंत्रालय जरूरी दवाएं किफायती दाम पर उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है । मंत्रालय ने जरूरी दवाओं की कीमतों पर काबू रखने के लिए उन्हें औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। अस्सी के दशक में 300 दवाएं इस सूची में शामिल थीं जबकि 1995 के बाद यह संख्या घटकर 74 रह गयी।

सर्वोच्च अदालत में दाखिल एक हलफनामे में मंत्रालय ने साफ किया है कि यह उसे मालूम है कि दवाओं के निर्मित किए जाने की लागत और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच भारी अंतर रहता है। मंत्रालय के अनुसार फार्मास्युटिकल विभाग को यह लिखा जा चुका है कि वह डीपीसीओ के दायरे में जरूरी दवाओं को रखे जाने के संबंध में अंतिम फैसला ले। शीर्ष अदालत मंत्रालय की ओर से दायर इस हलफनामे पर बृहस्पतिवार को विचार करेगी। दरअसल अदालत में इस मसले पर एक जनहित याचिका लंबित है जिसमें खुदरा बाजार में बिकने वाली जरूरी दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखने की मांग की गई है।

जस्टिस जीएस सिंघवी इस मसले पर फार्मास्युटिकल विभाग और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे पर भी विचार करेगी जिसमें तय समय में नए डीपीसीओ को लागू करने की संभावना से इंकार किया गया है। विभाग के अनुसार वह राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल नीति-2011 का मसौदा पेश कर चुका है जो वेबसाइट में है। इस मसौदे पर तमाम दवा कंपनियों और एनजीओ की टिप्पणियों के आमंत्रण की अंतिम तिथि 30 नवंबर रखी गई है। मौजूदा समय महज 74 जरूरी दवाओं की कीमतें डीपीसीओ के तहत नियंत्रित होती हैं। जबकि 80 के दशक में 300 दवाएं डीपीसीओ की सूची में शामिल थीं जिन्हें 1987 में घटाकर 140 कर दिया गया।

इसके बाद 1995 में इस सूची की संख्या को बड़े स्तर पर घटाया गया, 74 दवाएं सूची में रह गई और तब से इस सूची में कोई परिवर्तन नहीं किया गया जबकि संशोधित राष्ट्रीय जरूरी सूची (एनएलईएम) में 348 दवाओं को मंत्रालय और डीपीसीओ ने शामिल किया है। अब मंत्रालय ने हलफनामे ने कहा है कि बड़े स्तर पर जनता को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जरूरी दवाओं को डीपीसीओ के तहत लाकर उनकी कीमतों पर नियंत्रण रखा जाए।

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