दिल्ली: नकली चेक से पैसा निकालने वाले दबोचे गए

दक्षिण जिला डीसीपी छाया शर्मा के अनुसार आईआईटी के डिप्टी रजिस्ट्रार एमके गुलाटी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि संस्थान का सफदरजंग एंकलेव एरिया में स्थित केनरा बैंक की ब्रांच में खाता है। इस खाते से 19 नवंबर को नौ लाख, 75 हजार का चेक ममतास सिंह के नाम से कैश हुआ है, जबकि संस्थान ने इस तरह का कोई चेक जारी ही नहीं किया था। चेक गाजियाबाद की बीआरआईए ब्रांच में कैश हुआ था। इस नंबर का चेक संस्थान ने मात्र एक लाख 79 हजार रुपये का मे. वॉचर्स एंड कीपर्स के नाम से जारी किया था।
इसी तरह संस्थान का आईजीआई एयरपोर्ट पर पीएनबी शाखा में खाता है। इस खाते से भी 9,75000, 7,75000 और 7,15000 के चेक केश हुए हैं। ये चेक भी संस्थान ने जारी नहीं किए थे। कुल मिलाकर फर्जी चेकों से संस्थान के खातों से 34 लाख 80 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। पुलिस जांच में पता लगा था कि चेक विभिन्न बैंक शाखाओं से कैश करवाए जाते हैं। पुलिस एक जमानती विशाल कुमार को दबोचा। विशाल ने बताया कि उसने रिश्तेदार अजय कश्यप को कार लॉन लेने के लिए बैंक पास बुक दी थी। इस पर पुलिस ने आईआईटी के पास से अजय कश्यप को गिरफ्तार किया।
इसके कब्जे से लैपटॉप, विभिन्न बैंकों की पासबुक और चेक, पिस्टल, दो कट्टे और दस जिंदा कारतूस मिले। अजय ने बताया कि मनोज त्यागी के कहने पर वह आशू कुमार, विपिन कुमार और एस. मित्तल के साथ फर्जीवाड़े में लगा हुआ था। इस पर पुलिस ने आशू कुमार और विपिन कुमार को मुरादनगर से गिरफ्तार कर लिया। ये फर्जी आईडी पर बैंकों में खाता खुलवाते थे। ये खाता धारकों की डिटेल भी जुटाते थे। अजय के घर से कंप्यूटर यूनिट डेस्कटॉप, प्रिंटर, स्कैनर और स्टेशनरी बरामद हुई है। ये फर्जी और स्कैन किए गए कागजों से बैंकों में खाता खुलवा लेते थे।
विपिन पहले एक कोरियर कंपनी में काम करता था। वह विभिन्न कोरियर सर्विसेज से चेक चुरा लेता था। सरगना मनोज और अजय इन चेकों को स्कैन करते थे। इसके बाद बढ़िया क्वालिटी के रंगीन पेपर उसका प्रिंट लेते थे। स्कैन ये चेक पर रकम और नाम बदल देते थे, फिर फर्जी नाम से खुलवाए गए खातों में उसको कैश करवा लेते थे। विपिन ने पुलिस को बताया कि उसने आठ लाख रुपये से बहन की शादी की। जबकि कश्यप ने आठ लाख रुपये में एक प्लाट खऱीदा है।












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