बदसलूकी करना अमेरिका की पुरानी आदत

वर्ष 2003 में रक्षा मंत्री रहते हुए जार्ज फर्नाडीस और नागरिक उड्डयन मंत्री के तौर पर प्रफुल्ल पटेल भी अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी परिवहन सुरक्षा निजाम की इस बदइंतजामी का स्वाद चख चुके हैं। 2010 में प्रफुल्ल पटेल को एक वांछित व्यक्ति के धोखे में पूछताछ के लिए शिकागो हवाई अड्डे पर रोका गया था। वहीं संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप पुरी को उनकी पगड़ी के कारण जांच के लिए अलग से रोका गया।
तलाशी के लिए पगड़ी उतारने से इंकार के कारण इस सिख राजनयिक को आधे घंटे तक ह्यूस्टन हवाई अड्डे पर रोक कर रखा गया। इतना ही नहीं, गत वर्ष राजनयिक विशेषाधिकार को दरकिनार कर अमेरिका में भारत की तत्कालीन राजदूत मीरा शंकर की साड़ी पहनने के कारण अलग से सुरक्षा जांच की गई थी। इन सभी मामलों में भारत की ओर से प्रतिकार किए जाने के बाद अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से खेद जताया गया। साथ ही लगभग हर बार ऐसी घटना दोहराए न जाने का झूठा भरोसा दिया गया।
जार्ज फर्नाडीस के साथ डलास एअरपोर्ट पर तलाशी के लिए जुलाई 2004 में तत्कालीन विदेश उप सचिव रिचर्ड आर्मिटाज ने माफी मांगी थी। वहीं मीरा शंकर के साथ हुए व्यवहार पर अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन खेद जता चुकी हैं। अब देखना है कि इस माफीनामे के बाद अमेरिका क्या रणनीति बनाता है। वैसे सियासी गलियारों में चर्चा है कि अमेरिका की तरह भी भारत को भी सभी अमेरिकियों की तलाशी लेनी चाहिए जिससे उन्हें प्रोटोकाल का आभास हो। नहीं तो आने वाले दिनों में इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।












Click it and Unblock the Notifications