भाजपा के आरापों का जवाब नहीं दे पा रहे ऊर्जा मंत्री

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री भले ही अपने को बिजली खरीद घोटाले से अलग कर रहे हों लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठi नेता किरीट सोमैया उन्हें छोडऩे के मूड में नहीं हैं। भ्रष्टाचार उजागर समिति के अध्यक्ष किरीट सोमैया ने कहा कि टेंडर, बोली व कॉन्ट्रेक्ट देने की जो प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन में अपनायी जाती है उसकी विधिवत जांच की आवश्यकता है क्योंकि इसके बाद ही सज उजागर हो सकेगा।
सोमैया ने ऊर्जा मंत्री कई प्रकार आरोप लगाते हुए 11 प्रश्न पूछे जिसमें इस भ्रष्टiाचार की पोल खुल जाती है। सोमैया ने पूछा कि जुलाई में बिजली का मूल्य प्रति यूनिट 2.30 रुपये थे बावजूद इसके सरकार ने बिजली 4.70 रुपये की दर से बिजली खरीदी। सरकार ने केन्द्र के उत्तरी ग्रिड से 700 मेगावाट बिजली क्यों नहीं ली जबकि ऐसा किया जा सकता था। उन्होंने पूछा कि बिजली का अनुबंध करने से पूर्व अनुबंध ठेका प्रणाली के तहत सार्वजनिक किया गया था। आखिर क्या कारण रहे कि सरकार को अक्टूबर माह में यूपीपीसीएल को 4.70 रुपये की दर से बिजली नहीं मिली।
उन्होंने एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न करते हुए पूछा कि क्या यह सच है कि जुलाई माह में बिजली की आवश्यता कम होने के बावजूद निजी कम्पनियों से 442 लाख यूनिट बिजली 4.70 रुपये की दर से प्रतिदिन खरीदी गयी। क्या यह सच है कि अक्टूबर माह में निजी कम्पनियों ने पीसीएल को 9.30 लाख यूनिट बिजली दी। अक्टूबर माह में उपरोक्त कम्पनियों को 17.43 रुपये की दर से बिजली का भुगतान किया गया। इन सवालों के जवाब तो फिलहाल ऊर्जा मंत्री नहीं दे पाए हैं लेकिन भाजपा के इस कदम ने उन्हें चारों ओर से जकड़ दिया है जिसके चलते लोकायुक्त की जांच का दायरा कसता जा रहा है। फिलहाल उम्मीद जतायी जा रही है कि आने वाले दिनों में ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय भी लोकायुक्त की जांच में बुरी तरह से फंस जाएंगे।












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