अब कोर्ट में बच्चे की भी गवाही होगी मंजूर: अदालत

याकूब ने 15 अगस्त 1997 को अपने तीन साल के पुत्र के सामने पत्नी रेहाना का कत्ल कर दिया था। आरोपी की अपील को खारिज करते हुए न्यायाधीशों ने कहा कि तथ्यों, परिस्थितियों और सबूतों पर संपूर्णता में विचार करते हुए हमारा मानना है कि आरोपी ने जानते समझते हुए रेहाना पर मिट्टी का तेल डाला और उसे आग लगा दी।
मुकदमे की सुनवाई करने वाली अदालत द्वारा दी गयी सजा की पुष्टि की जाती है। मुकदमे के समय दस वर्ष की आयु वाले इरशाद ने अदालत में वारदात का सिलसिलेवार ब्यौरा पेश किया और कहा कि उसके पिता ने मां के साथ कलह के बाद उसे आग लगा दी थी। वारदात के समय सिर्फ तीन साल की आयु में दिये हुए बयान पर भी वह कायम रहा। तीन साल की उमर में उसने जो जानकारी पुलिस को दी थी वही जानकारी उसने दस साल की उर्म्र में भी दी। इससे बच्चे की सत्यता साबित होती है।












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