अब कुमार विश्वास को भी फंसाने की साजिश

कालेज का दावा है कि उसने कुमार विश्वास को कई बार नोटिस भी जारी कर रखा है। सिर्फ अन्ना आंदोलन के लिए ही नहीं कॉलेज का कहना है कि अपने निजी कामों के लिए भी कॉलेज आने को लेकर उनका यही रवैया रहा है। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक साल में वो दस से 20 फीसदी ही कॉलेज आते हैं। कुमार विश्वास के पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे। डा. कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया।
विभिन्न पत्रिकाओं में नियमित रूप से छपने के अलावा डा कुमार विश्वास की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो संस्करण में) . विख्यात लेखक स्वर्गीय धर्मवीर भारती ने डा विश्वास को इस पीढी का सबसे ज़्यादा सम्भावनाओं वाला कवि कहा है। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डा विश्वास एक अग्रणी कवि हैं। वो अब तक हज़ारों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ और संचालन कर चुके हैं।
डा कुमार विश्वास हिन्दी मंच के एकमात्र ऐसे कवि हैं, जिनकी कविता (बिना किसी वाद्य यंत्र के, अपने स्वर में) देश के प्राय: सभी बड़े मोबाईल आपरेटरों के कालर बैक ट्यून (काल करने वाले को सुनाई देने वाला ट्यून) में शामिल है। हालांकि पूर्व आईपीएस अफसर और टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने दावा किया है कि वो इकोनॉमी क्लास में सफर कर आयोजकों से पूरा किराया वसूलने के बाद बची रकम बच्चों को शिक्षित करने के लिए 'जमा" करती थीं। लेकिन कम से एक आयोजक ने बेदी के इन दावों को खारिज कर दिया है। अब देखना है कुमार विश्वास क्या कहते हैं।












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