नोएडा एक्सटेंशन भू अधिग्रहण पर फैसला किसानों के हक में

Allahabad High Court
दिल्ली (ब्यूरो)। नोएडा एक्सटेंशन भूमि-‍अधिग्रहण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है। यह फैसला किसानों के पक्ष में लिया गया है। हाईकोर्ट ने बिल्‍डरों को आदेश दिया है कि वो किसानों को 64 फीसदी मुआवजा और 10 फीसदी विकसित जमीन दें। फैसले के वक्‍त हाईकोर्ट ने तीन गांवों में अधिग्रहण को पूरी तरह गलत गैरकानूनी करार देते हुए किसानों की जमीन वापस करने की बात कही।

यानी दिवाली के पहले ही कहीं दीप रौशन होंगे तो कहीं अंधेरा कायम रहेगा। इस फैसले का इंतजार किसानों, बिल्डरों, निवेशकों व प्राधिकरण के अधिकारियों को लंबे समय से था इसलिए उनकी धड़कनें बढ़ी हुई थीं। सवा लाख निवेशकों, बिल्डरों, किसानों व प्राधिकरण के भविष्य पर फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने 30 गांवों पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

गौरतलब है कि अकेले नोएडा एक्सटेंशन में निवेशकों, बिल्डरों व प्राधिकरण का करीब ढाई हजार करोड़ रुपये फंसा हुआ है। नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी की 589 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को निरस्त कर दिया था। इस फैसले से 11 बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुए थे।

प्राधिकरण ने फैसले पर कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। पतवाड़ी का फैसला आते ही ग्रेटर नोएडा व नोएडा के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी शुरू कर दी। नोएडा एक्सटेंशन समेत ग्रेटर नोएडा के 40 गांवों के किसानों ने 491 याचिकाएं कोर्ट में डालीं। नोएडा के भी 24 गांवों के किसानों ने याचिकाएं दायर की हैं। जमीन अधिग्रहण का मामला कोर्ट में जाने से नोएडा एक्सटेंशन का विकास कार्य ठप हो गया। फ्लैटों की बुकिंग बंद हो गई। अकेले नोएडा एक्सटेंशन में सवा लाख लोगों ने फ्लैट बुक कर रखे थे, उनके मकान का सपना अधर में है।

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