नोएडा एक्सटेंशन पर हाईकोर्ट के फैसले से सभी की बल्ले-बल्ले

इस फैसले से सबसे ज्यादा खुश बिल्डर हैं जिनका वहां करोड़ों रुपये अंधेरे में फंसा हुआ था। इसलिए कोर्ट के इस फैसले से किसानों, बिल्डरों, निवेशकों और नोएडा अथारिटी के अधिकारियों की बल्ले बल्ले है। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने एक बीच का रास्ता अख्तियार किया है जिससे किसी को भी नुकसान होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी को भी इस फैसले पर आपत्ति हो तो वह 90 दिन के भीतर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।
नोएडा एक्सटेंशन के भूमि-अधिग्रहण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है। इस फैसले से किसानों, बिल्डरों, निवेशकों और नोएडा अथारिटी के अधिकारियों सभी को फायदा पहुंचा है। हालांकि हाईकोर्ट ने तीन गांवों के अधिग्रहण को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। जिन गांवों का अधिग्रहण रद्द किया गया है उसमें असदुल्लापुर, देवला, चक शाहबेरी गांव शामिल है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में किसानो को दी जाने वाली विकसित भूमि को भी बढा दिया है। अब किसानों को 10 फीसदी विकसित भूमि दी जाएगी। यानी किसान पहले से 25 फीसदी भूमि ज्यादा पा सकेंगे। पहले यह छह फीसदी था पर नोएडा अथारिटी ने कुछ दिनों ही पहले इसे बढ़ाकर 8 फीसदी कर दिया था।
वहीं कोर्ट ने किसानों को मिलने वाले मुआवजे में भी संशोधन किया है। अब 60 गावों के किसानों को 64 फीसदी राशि बतौर मुआवजा ज्यादा मिलेगा। गौरतलब है कि नोएडा एक्सटेंशन समेत ग्रेटर नोएडा के 40 गांवों के किसानों ने 491 याचिकाएं कोर्ट में डाल रखी थी। नोएडा के भी 24 गांवों के किसानों ने याचिकाएं दायर की हैं। जमीन अधिग्रहण का मामला कोर्ट में जाने से नोएडा एक्सटेंशन का विकास कार्य ठप हो गया था। फ्लैटों की बुकिंग बंद हो गई।
अकेले नोएडा एक्सटेंशन में सवा लाख लोगों ने फ्लैट बुक कर रखे थे, उनके मकान का सपना अधर में था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब उनके घर का सपना हकीकत में बदलने वाला है। आप बता दें कि भूमि अधिग्रहण के मामले पर हाईकोर्ट में तीन सदस्यीय पीठ लगातार सुनवाई कर रही थी। पिछले महीने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसले को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया था। अब आज कोर्ट ने फैसला सुनाया है। हालांकि अभी भी कयास लगाया जा रहा है कि किसान अधिग्रहण को रद्द करने की बाबत सुप्रीम कोर्ट में जा सकते हैं। पर किसानों के वकील ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले से खुश हैं क्योंकि कोर्ट ने एक बीच का रास्ता निकाला है।












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