चप्पल जूते चुराने में माहिर है वाराणसी का शेरू

ग्रामीण अपने जूते चप्पल घरों के भीतर रखते ही हैं जबकि समारोह आदि के दौरान चौकीदार नियुक्त करते हैं जो शेरू की इस हरकत पर नजर रखता है। सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में चोलापुर क्षेत्र के कटारी गांव के निवासी इन दिनों एक पालतू कुत्ते शेरू से परेशान है। शेरू की जूते चप्पल चुराने की आदत से गांव वाले ही नहीं बल्कि उसके मालिक भी त्रस्त हैं। गांव में चप्पल चोर कुत्ते की दहशत इस कदर फैली है कि ग्रामीण घर के बाहर अथवा खेत खलिहान में जूते चप्पल नहीं उतारते।
यही नहीं यहां धार्मिक स्थलों में जूते चप्पल की देखभाल के लिये विशेष रूप से चौकीदार की नियुक्ति होने लगे है। शेरू नामक इस कुत्ते की चप्पल चोरी के किस्से पूरे गांव में फैल गये हैं। अब ग्राम पंचायत इस समस्या के स्थायी निदान के लिए विचार कर रही है। उसके स्वामी सभाजीत प्रजापति का कहना है कि दो वर्ष पूर्व जब वह इस कुत्ते के बच्चे को घर लाए तो वह कभी-कभी घरवालों के जूते व चप्पलों को उठाकर एक कोने में छिपाता था। जब भी घर के किसी सदस्य की चप्पल नहीं मिलती तो वह उस कोने में जाता और देखता की शेरू ने वहां चप्पल मिल जाती।
भूरे रंग के कुत्ते की इस आदत के बारे में प्रजापति ने सोचा की कुछ समय बाद सबकुछ ठीक हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं नहीं। समय के साथ उसकी यह अजीब आदत बढ़ती चली गयी और घरवालों की पादुकाओं के अतिरिक्त बाहर वालों की भी चप्पलें उठाकर घर लाने लगा। धीरे-धीरे यह बात गांव में फैलती चली गयी कि श्री प्रजापति का कुत्ता ही चप्पल चोर है।
उसकी इस आदत की वजह से प्रजापति ने कुत्ते को कई बार मारा और घर से भगा भी दिया लेकिन उसकी आदत में कोई सुधार नहीं आया। उसे जब भी मौका मिलता है वह किसी न किसी की चप्पल चुराकर घर ले आता है। चुराये गये जूते चप्पल को वह कोई नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि उसे एक सुरक्षित स्थान पर रख देता है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत ग्राम पंचायत में कर दी है अब गांव वाले इस समस्या से निजात पाने की कोशिश कर रहे हैं।












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