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दलित पीएम पर माया ने बंद की कांग्रेस की बोलती

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Uttar Pradesh Chief Minister Mayawati
दिल्ली (ब्यूरो)। मायावती ने दलित प्रधानमंत्री का मामला उछाल कर कांग्रेस समेत सारी पार्टियों को मुसीबत में फंसा दिया है। यह ऐसा मुद्दा है जिस पर कोई भी पार्टी मायावती का विरोध नहीं कर सकती। विरोध का मतलब बहुत बड़े वोट बैंक को खो देना। वादा करना भी कहीं से संभव नहीं है। बसपा को छोड़कर किसी भी पार्टी में शीर्ष पर कोई दलित नेता नहीं है। मायावती का यह वार कांग्रेस पर इतना भारी पड़ गया है कि कांग्रेस ने अनिल शास्त्री को सफाई देने में लगा दिया है।

अनिल शास्त्री ने कहा है कि वह दिन दूर नहीं जब कांग्रेस पार्टी में प्रधानमंत्री के तौर पर किसी दलित को चुना जाएगा। एक सोशल साइट पर शास्त्री ने लिखा, 'कांग्रेस ने अब तक विभिन्न राज्यों में चार दलित मुख्यमंत्री बनाए हं। वह दिन दूर नहीं जब पार्टी देश को दलित प्रधानमंत्री देगी, लेकिन यह वोट बैंक के लिए नहीं बल्कि दलित वर्ग के सशक्तीकरण के लिए होगा।" यह बयान मायावती द्वारा विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस की ओर से मीरा कुमार या सुशील कुमार शिंदे को पीएम बनाए जाने संबंधी दावे के मद्देनजर आया है।

हैरत की बात यह है की मीरा कुमार और सुशील कुमार बिल्कुल खामोश है। मीरा कुमार को लगता है कि उनके पिता पीएम तो नहीं बन पाए लेकिन उनके लिए संभावनाएं जरूर दिख सकती हैं, अगर मायावती का यह हमला बरकरार रहा। कांग्रेस ने तो सफाई दी है बाकी पार्टियां तो एक दम खामोश हैं। बीजेपी चुप है। सपा इस दौड़ से बाहर है इसलिए उसके लिए इसका ज्यादा मतलब नहीं है। सपा का मतलब सिर्फ यूपी से है।

गौरतलब है नोएडा में लगभग पौने सात सौ करोड़ रुपयों की लागत से बने राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल का उदघाटन करते हुए मायावती ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि बाबू जगजीवन राम के सही उम्मीदवार होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया था। मायावती ने पीएम पद के लिए खुद कांग्रेस को सुझाव दे दिए कहा कि मीरा कुमार या सुशील कुमार शिंदे को पीएम बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री मायावती ने संभावना जताई थी कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले मीरा कुमार या सुशील कुमार शिंदे के रूप में किसी दलित को प्रधानमंत्री बना सकती है, लेकिन कांग्रेस के साथ समस्या है कि वह दलित को पीएम बनाने की घोषणा नहीं करती है तो दलित वोट बैंक उससे दूर चला जाएगा। दलित पीएम का वादा करना भी पार्टी के लिए कतई मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि हर मामले में बड़बोलेपन के लिए दिग्विजय सिंह से जब दलित पीएम का सवाल उठाया गया तो वह इससे टालने में लगे रहे । जबकि लादेन की मौत पर उन्होंने लादेनजी कहने में कोई गुरेज नहीं किया था। वह कोई भी बयान दे सकते हैं। इसके बावजूद यहां उनकी बोलती बंद हो गई। जिस तरह मायावती ने यह मामला उछाला है उससे जाहिर है कि आनेवाले समय में बीजीपी और कांग्रेस दोनों के लिए परेशानियां बढ़ेंगी। दलित का पीएम का कोई विरोध नहीं कर पाएगा, बनाने की संभावना दूर-दूर तक नहीं दिखती।

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English summary
Mayawati's Dalit prime minister's card put all party in trouble. No party can oppose it. Congress in now in back-foot.
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