हिसार उपचुनाव में चला 'कुलदीप का ट्रैक्टर' व 'अन्ना फैक्टर'

हिसार उपचुनाव को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञ जिसकी कयास लगा रहे थे वही हुआ। देश-प्रदेश की नजरों में छाए रहे हिसार संसदीय उपचुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस को 'कुलदीप का ट्रैक्टर' व 'अन्ना फैक्टर' की बदौलत हार नसीब हुई। कांग्रेस ने यह तो सोचा था कि इस उपचुनाव में में हारेंगे तो जरूर लेकिन इतनी बुरी तरह से हारेंगे वह नहीं सोचा था। हालात तो ऐसे बन गए कि जयप्रकाश को जमानत बचाने के लिए भी ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ गया।
कांग्रेस को मिले राजनीतिक झटके से राज्य की राजनीति में बदलाव आने के आसार बन गए है। मुख्यमंत्री हरियाणा भुपेंद्र सिंह हड्डा ने अपाने दल-बल के साथ पूरे संसदीय क्षेत्र में दो सप्ताह तक डेरा डाले रखा था और कांग्रेसी प्रत्याशी को विजयी श्री दिलवाने के लिए कड़ी मशक्त की, मगर कांग्रेसी भीतरघात ने हुड्डा टीम के प्रयासों पर पानी फेर दिया था। उपर से अन्ना टीम ने भी टाइम से इंट्री मारकर रही सही कसर निकाल दी। कांग्रेसी दिग्गज इस पराजय को विशेष तौर पर नहीं ले रहे, क्योंकि इस चुनाव परिणाम से देश-प्रदेश के कांग्रेसी शासन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
हिसार संसदीय उपचुनाव ने भले ही कांग्रेस को स्वीकार नहीं किया, मगर हुड्डा विरोधी खेमा के हौसलें जरूर बढ़ा दिए है। चुनाव प्रचार के समय में भी देखा गया था कि कांग्रेस के कार्यकर्ता इमने उत्साहित नहीं थे जिनते हजकां-भाजपा गठबंधन व इनेलो थी। कांग्रेसी नेता दलील दे रहे है कि जाट बनाम गैर जाट व महंगाई से खफा मतदाता कांग्रेस को वोट न देकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
क्या हैं इस जीत के मायने
हिसार संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में कुलदीप बिश्रोई के तौर पर मिली हजकां-भाजपा गठबंधन जीत के बाद विधानसभा सीटों पर कुछ खास फर्क तो नहीं पड़ेगा लेकिन इनेलो व कांग्रेस के बागी विधायकों को हरियाणा में नजर आ रहा तीसरा मोर्चा जरूर आकर्षित करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों को मानना है कि कांग्रेस व इनेलो के कई बागी दिख रहे विधायक इस गठबंधन की और जा सकते हैं।
कुलदीप बिश्रोई के जीतने के बाद आदमपुर सीट पर होने वाले विधानसभा चुनाव पर हजकां की सीटी जीत निश्चित है। यह सीट बिश्रोई परिवार के लिए वैसे ही है जैसे अमेठी की सीट गांधी परिवार के लिए है। रतिया विधानसभा सीट पर भी इनेलो के विधायक की मौत के बाद उपचुनाव होगा। जिस पर कहा जा रहा है कि इनेलो के पास कोई सशक्त उम्मीदवार नहीं है। यहां कांग्रेस मोर्चा मार सकती है। आपको बता दें कि इस समय प्रदेश की कुल 90 सीटों पर 40 कांग्रेस की है जबकि उसे 7 निर्दलीय व 5 हजकां के उम्मीदवारों की समर्थन मिला हुआ है। वहीं 32 सीटों पर इनेलो का कब्जा है। जबकि 4 सीटों पर भाजपा व एक पर बसपा का कब्जा है।












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