दिवाली के बाद लोगों का दिवाला निकालने की तैयारी

Airport charges may go up
दिल्ली (ब्यूरो)। केंद्र सरकार दिवाली के बाद लोगों का दिवाला निकालने की तैयारी में है। इसके लिए वह हवाई यात्रा के साथ ही साथ रेल किराए में भी बढ़ोतरी करने जा रही है जिससे आने वाले दिनों में हवाई औऱ रेल यात्रा महंगी हो जाएगी। सूत्रों ने बताया कि हवाई अड्डा आर्थिक नियामक प्राधिकारण (एईआरए) दिल्ली और मुंबई के हवाई अड्डों पर लैंडिंग, पार्किंग समेत कई तरह के शुल्कों को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अगर इसे अमली जामा पहनाया जाता है तो शुल्क में पांच से छह सौ तक की बढ़ोतरी हो सकती है जिसका असर यात्रियों की जेब पर भी होगा। यानी इन दोनों शहरों में हवाई टिकट का किराया बढ़ने की संभावना है। दरअसल दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड और मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड बढ़ती महंगाई के मद्देनजर शुल्क बढ़ाने के पक्ष में हैं।

वहीं रेलवे की माली हालत को देखते हुए बोर्ड ने रेल बजट से पहले ही किराए में बढ़ोतरी की सिफारिश की है। दरअसल, रेलवे पर भारी वित्तीय संकट छाया हुआ है। इसके फौरी समाधान के लिए परिवर्तनशील भाड़ा नीति के बहाने सर्दियों के लिए मालभाड़ा दरों में बढ़ोतरी कर दी है। सूत्रों ने बताया कि रेलवे का फंड बैलेंस न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। इस हालत से बचने के लिए ही वित्त मंत्रालय और योजना आयोग ने पिछले महीने रेलवे से किराए में बढ़ोतरी पर जल्द से जल्द विचार करने को कहा था। इसके बाद रेल मंत्री ने इस बाबत मंथन की।

साथ ही आर्थिक क्षेत्र की एक सर्वेक्षण एजेंसी को यह बताने को कहा था कि किस दर्जे में कितनी बढ़ोतरी होनी चाहिए। हाल में एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। इसके आधार पर रेलवे बोर्ड वित्त मंत्रालय और योजना आयोग के पत्र के माफिक जल्द से जल्द किराया बढ़ाने के फेर में है। सूत्रों के मुताबिक सर्वेक्षण एजेंसी ने स्लीपर क्लास, थर्ड एसी और फ‌र्स्ट एसी के किराए में बढ़ोतरी की सिफारिश की है। जबकि जनरल और सेकेंड एसी के किराए यथावत रखने को कहा है। एजेंसी के कुछ सुझावों से रेल मंत्री सहमत नहीं हैं। मसलन, वह स्लीपर क्लास के किराए में छेड़छाड़ नहीं करना चाहते। जबकि सेकेंड एसी का किराया बढ़ाने के पक्ष में हैं।

रेलवे बोर्ड एजेंसी के सुझावों को ज्यों का त्यों लागू करना चाहता है। रेल मंत्री की सबसे बड़ी परेशानी बजट से पहले या रेल बजट में किराया बढ़ाने को लेकर है। रेलवे बोर्ड बजट से पहले ही बढ़ोतरी चाहता है। उसका तर्क है कि भाड़े की तरह यात्री किराया बढ़ाने के लिए भी संसद की मंजूरी की कोई आवश्यकता नहीं है। रेल मंत्री को दोनों स्थितियां जोखिम भरी दिखाई देती हैं। पहले किराए बढ़ाना लीक से हटकर होगा। इससे सांसदों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। जबकि रेल बजट में इसकी घोषणा के अपने नुकसान हैं।

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