दिवाली के बाद लोगों का दिवाला निकालने की तैयारी

वहीं रेलवे की माली हालत को देखते हुए बोर्ड ने रेल बजट से पहले ही किराए में बढ़ोतरी की सिफारिश की है। दरअसल, रेलवे पर भारी वित्तीय संकट छाया हुआ है। इसके फौरी समाधान के लिए परिवर्तनशील भाड़ा नीति के बहाने सर्दियों के लिए मालभाड़ा दरों में बढ़ोतरी कर दी है। सूत्रों ने बताया कि रेलवे का फंड बैलेंस न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। इस हालत से बचने के लिए ही वित्त मंत्रालय और योजना आयोग ने पिछले महीने रेलवे से किराए में बढ़ोतरी पर जल्द से जल्द विचार करने को कहा था। इसके बाद रेल मंत्री ने इस बाबत मंथन की।
साथ ही आर्थिक क्षेत्र की एक सर्वेक्षण एजेंसी को यह बताने को कहा था कि किस दर्जे में कितनी बढ़ोतरी होनी चाहिए। हाल में एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। इसके आधार पर रेलवे बोर्ड वित्त मंत्रालय और योजना आयोग के पत्र के माफिक जल्द से जल्द किराया बढ़ाने के फेर में है। सूत्रों के मुताबिक सर्वेक्षण एजेंसी ने स्लीपर क्लास, थर्ड एसी और फर्स्ट एसी के किराए में बढ़ोतरी की सिफारिश की है। जबकि जनरल और सेकेंड एसी के किराए यथावत रखने को कहा है। एजेंसी के कुछ सुझावों से रेल मंत्री सहमत नहीं हैं। मसलन, वह स्लीपर क्लास के किराए में छेड़छाड़ नहीं करना चाहते। जबकि सेकेंड एसी का किराया बढ़ाने के पक्ष में हैं।
रेलवे बोर्ड एजेंसी के सुझावों को ज्यों का त्यों लागू करना चाहता है। रेल मंत्री की सबसे बड़ी परेशानी बजट से पहले या रेल बजट में किराया बढ़ाने को लेकर है। रेलवे बोर्ड बजट से पहले ही बढ़ोतरी चाहता है। उसका तर्क है कि भाड़े की तरह यात्री किराया बढ़ाने के लिए भी संसद की मंजूरी की कोई आवश्यकता नहीं है। रेल मंत्री को दोनों स्थितियां जोखिम भरी दिखाई देती हैं। पहले किराए बढ़ाना लीक से हटकर होगा। इससे सांसदों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। जबकि रेल बजट में इसकी घोषणा के अपने नुकसान हैं।












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