बाबा को छोड़ अपने वतन चली गोरी बाला

विदेशी कल्चर में पली-बढ़ी क्लाउडिया शिजलर काफी दिनों से भारत में रह रही थी। इसी बीच एक साधु से उसकी नजदीकियां बढ़ी फिर दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। मगर शादी के बाद बंद आश्रम में क्लाउडिया अपने संस्कार और संस्कृति को नहीं छोड़ पाई, जो बाबा को नागवार गुजरा और दोनों के छह माह के वैवाहिक जीवन में फसाद का कारण बना। विवाद की सबसे बड़ी वजह पहनावा और मोबाइल फोन था। दोनों पर बाबा ऐतराज जताते, लेकिन क्लाउडिया उनके ऐतराज को अनसुना कर देती। मगर अब बाबा क्लाउडिया से समझौते को तैयार हैं।
अपने और क्लाउडिया (24) के रिश्तों के विषय में अलीगढ़ के पास चंडौस स्थित आश्रम के बाबा रामस्वरूप उर्फ बालक दास (49) बताते हैं कि वे बेशक आठ बरस पहले इलाहाबाद के कुंभ मेले में मिले, लेकिन असली मुलाकात 4 मार्च 2011 को हुई। उस दिन बाबा के परिचित एक रिटायर्ड आईपीएस जो अब साधु हैं, वे क्लाउडिया को हरिद्वार से अपने साथ बाबा के आश्रम पर लाए थे। यहां से वे कई लोग उत्तराखंड नीम सारड़ी की परिक्रमा के लिए गए। वहां से लौटकर साथ आए तो क्लाउडिया काफी समय तक बाबा के पास रही। इसी दौरान दोनों ने शादी का मन बना लिया और 26 मई को दोनों ने महानगर के आर्यसमाज मंदिर में शादी तक कर ली।
बाबा बताते हैं कि वह चाहते थे कि क्लाउडिया उनके साथ दांपत्य जीवन में भारतीय नारी की तरह रहे, लेकिन क्लाउडिया अपने पहनावे में और अपनी तरह से रहती थी। खाना बनाने और आश्रम की साफ सफाई से भी उसका कोई लेना देना न था। बाबा खुद खाना बनाते। एक बार बाबा ने क्लाउडिया से आरती के लिए दीपक में बाती लगाने की बात कही तो उसने कह दिया कि बाती बनाना नहीं आता। इसी दिन से बाबा का पारा चढ़ गया। इसके बाद दूसरी समस्या मोबाइल फोन से पैदा हुई। क्लाउडिया अक्सर कहीं बतियाती रहती थी, जो बाबा को अखरता था और वे उसे टोकते थे। इन्हीं तमाम विवादों ने एक दिन झगड़े का रूप धारण कर दिया और क्लाउडिया उन्हें छोड़कर चली गई।












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