दिल्ली: चोर ने लिखा पत्र धीरे-धीरे सारे जेवर लौटा दूंगा
दिल्ली
(ब्यूरो)। दहेज के पैसे वापस करने के लिए एक युवक ने फिल्मी अंदाज में एक युवती से दोस्ती की फिर झांसे से घर की चाबी का नमूना लेकर नकली चाबी बनाई और जेवर गायब कर दिए। इन जेवरों को एक फाइंनेंस कंपनी में गिरवी रख कर लोन ले लिया। यही नहीं उसने पत्र लिख कर कहा कि धीरे-धीरे सारे जेवर लौटा देगा। पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर जेवर बरामद कर लिया है। युवक अमित का दावा है कि उसने दहेज के पैसे लौटाने के लिए ऐसा किया। जांच में पता चला कि जिस घर में उसने चोरी की उसमें ब्रॉड बैंड कनेक्शन लगाने के दौरान घर के मुखिया की बेटी से दोस्ती कर ली। घर के दरवाजे का चॉबी का नमूना लेकर उसकी नकली चॉबी बना ली। चोरी किए 20 लाख के जेवरात को उसने मुथूट फाइनेंस कंपनी में देकर उससे लोन ले लिया। जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। id="toptextpromo">जिला
पुलिस उपायुक्त ए के ओझा ने बताया कि गोविंद प्रसाद गुप्ता सपरिवार द्वारका सेक्टर 19 में रहते हैं। उनकी पत्नी सरकारी अधिकारी है। बेटा इंजीनियर और बेटी एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है। उनका परिवार इस वर्ष 20 अप्रैल को वैष्णो देवी की दर्शन करने गया था। 24 को वापस आने पर चोरी होने का पता चला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इसी दौरान गोविंद गुप्ता की बेटी के नाम एक गुमनाम पत्र आया। जिसमें चोर ने धीरे धीरे कर सारा सामान लौटाने की बात कही। इससे पुलिस ने किसी परिचित पर शक जाहिर किया। जांच से पता चला कि उनकी बेटी का कॉल सेंटर में काम करने वाले अमित से दोस्ती है। पुलिस ने अमित को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि चोरी किए गए सारे जेवरात को उसने मुथूट फाइनेंस कंपनी में डालकर लोन ले लिया था। पुलिस नेसारे जेवरात और अन्य सामान बरामद कर लिया। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>
अमित
का दावा है कि उसका चोरी का इरादा नहीं था, धीरे-धीरे वह सारा पैसा लौटाना चाहता था। इसलिए उसने पत्र लिखा था। मुजफ्फरनगर निवासी अमित की वर्ष 2005 में शादी हुई थी। लेकिन, उसकी पत्नी से अनबन हो गई। उसकी पत्नी ने उत्तर प्रदेश में उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवा दी। दहेज के रकम को वापस करने के लिए उसे रुपये की जरूरत थी। इसी दौरान उसने केबल पर एक फिल्म देखा। जिसमें घर के जानकार की मदद लेकर चोरी को अंजाम दिया गया था। उसने भी इसी तरह से गोविंद प्रसाद की बेटी का सहारा लिया।











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