क्या गरीब की रोटी की कीमत पूछते हैं राहुल गांधी?

उत्तर प्रदेश का दौरा कर रहे राहुल गांधी लगातार राज्य सरकार पर लापरवाही व केन्द्रीय धन के दुरपयोग का आरोप लगा रहे हैं लेकिन राज्य सरकार के अपने तर्क हैं। कुल मिलाकर लोगों के विकास का मुद्दा राजनैतिक मुद्दा बन कर रह गया है। बुंदेलखंड के दौरे पर आए राहुल ने दलित के साथ मुस्लिम को भी वोट बैंक समझते हुए उसे रिझाने की भरसक कोशिश की। राहुल गांधी भले ही यह बताने की कोशिश कर रहे हों कि वह दलितों को अछूत नहीं मानते लेकिन उनकी भलार्ई के लिए कुछ कर नहीं पा रहे हैं।
राहुल का तर्क है कि प्रदेश में उनकी सरकार होगी तो राज्य कायाकल्प हो जाएगा। हालांकि इस वक्त मंहगाई सबसे बड़ा मुद्दा है और मंहगाई केन्द्र की देन हैं जहां कांग्रेस की ही सरकार है। दलितों के घर रोटी खाने वाले राहुल रोटियों का स्वाद तो लेते ही जा रहे हैं। राहुल कहीं रोटी खा रहे हैं तो कहीं पूड़ी सब्जी तो कहीं घरों के बारह खेल रहे नंगे नन्हें मासूम बच्चों को गोद में उठा रहे हैं। यह सबकुछ करके वह जो कुछ भी साबित करना चाहें लेकिन जिस नंगे बच्चे को वह गोद में उठा रहे है उसके तन पर पकड़ा क्यों नहीं है इसका जवाब उनके पास नहीं।
गरीब के घर रोटी खाने वाले राहुल को यह नहीं पता होगा कि उस एक रोटी को कमाने के लिए गरीब को कितनी मेहनत करनी पड़ती है। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो जमीन पर बैठ कर रोटी खाने वाले राहुल ने एक बार भी मेहमाननवाजी करने वाले गरीब से उसे रोटी का दाम नहीं पूछा यह साबित करता है कि राहुल गरीबों व दलितों को सिर्फवोट बैंक समझकर अपना प्रेम दिखा रहे हैं।












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