दिग्विजय सिंह से कांग्रेस भी है परेशान

प्रधानमंत्री के अन्ना को पत्र और राहुल गांधी की मंशा के मुताबिक लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाने की दिशा पर आगे बढ़ रही सरकार आरोप-प्रत्यारोप में फंसने के नुकसान देख रही है। इसीलिए, दिग्विजय ने एक तरफ अन्ना-संघ संबंध स्थापित करने की कोशिश की, वहीं पार्टी ने अधिकृत तौर से इससे दूरी बनाकर भ्रष्टाचार के मोर्चे पर बड़ी लाइन खींचने की दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर दिया। दिग्विजय ने अन्ना को लिखे अपने पहले पत्र में कांग्रेस को वोट न देने की अन्ना की अपील पर कई गंभीर सवाल उठाए थे। अन्ना के आंदोलन को संघ के समर्थन की बात भी कही थी। जवाब में अन्ना ने संघ का समर्थन होने की बात से इंकार किया था।
अन्ना के उस बयान के जवाब में दिग्विजय ने उन्हें 12 अक्टूबर को दूसरी चिट्ठी लिखी, जिसके साथ संघ के सरकार्यवाह की चिट्ठी भी नत्थी की। जंतर-मंतर पर मार्च में अन्ना के पहले अनशन के दौरान संघ की तरफ से जोशी ने समर्थन पत्र सौंपा था। वह पत्र उस समय भी सार्वजनिक हुआ था, जिसे अब सिंह ने सबूत के तौर पर पेश किया है। द्विवेदी ने कहा कि पीएम ने अन्ना को पत्र लिखा है। उसके बाद मैं नहीं समझता कि किसी पत्र की जरूरत है। जहां तक आरएसएस से संबंधों का सवाल है तो संघ के बड़े पदाधिकारी ने ही कहा है कि उन्होंने अन्ना के आंदोलन को समर्थन दिया है।












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