पार्टी के आंतरिक चुनाव में भी दखल दे चुनाव आयोग

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दिल्ली (ब्यूरो)। पणजी में शनिवार को सुशासन में चुनाव सुधार की भूमिका विषय पर आयोजित एक व्याख्यान में पूर्व चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह ने चुनाव आयोग से राजनीतिक दलों के सांगठनिक चुनावों में दखल देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों का संविधान भारतीय संविधान के दायरे में हो इसके लिए यह बेहद जरूरी है।

इस दौरान लिंगदोह ने एक बड़ा खुलासा भी किया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ मुमकिन है। बेबाकी के लिए मशहूर लिंगदोह ने दो टूक कहा कि कोई भी मशीन अभेद्य नहीं है। लिंगदोह का यह बयान ईवीएम प्रणाली पर सवालिया निशान लगा चुके भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों के रुख का समर्थन करने वाला है।

उन्होंने कहा कि आप ईवीएम से चिप निकालकर अपनी चिप लगा सकते हैं लेकिन अगर ऐसा हुआ तो पूरी चुनाव व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हालांकि ईवीएम मशीन का निर्माण करने वालों की प्रशंसा करते हुए लिंगदोह ने कहा कि मशीन इतनी सस्ती है कि कोई भी इसे खरीदना नहीं चाहता। इसकी खरीद प्रक्रिया में कोई घूस लेने आदि का सवाल ही नहीं उठता।

उन्होंने बताया कि भूटान भी भारतीय ईवीएम का इस्तेमाल कर रहा है। लिंगदोह ने जोर दिया कि चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों के सांगठनिक चुनाव की व्यवस्था को अपने हाथों में लेना चाहिए जिससे पारदर्शिता आ सके। उन्होंने सिविल सोसायटी के सदस्यों को पार्टियों के आंतरिक चुनाव के दौरान पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त किए जाने की मांग की।

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