सुलगते तेलंगाना पर केंद्र व राज्‍य सरकार में असमंजस

UPA and State Govt in Dilemma over Telangana issue
तेलंगाना को अलग राज्‍य बनाने की मांग को लेकर वहां के लोगों की भावनाएं अब बेकाबू हो चली हैं। यह आंदोलन अब तेलंगाना क्षेत्र के साथ-साथ पूरे आंध्र प्रदेश को बर्बादी के रास्‍ते पर लेकर आगे बढ़ रहा है। तेलंगाना मुद्दे पर कांग्रेस की राज्‍य सरकार और केंद्र में यूपीए की सरकार में असमंजस बरकरार है। सुलगते तेलंगाना मु्द्दे पर गुरमेल सिंह की रिपोर्ट....

हैदराबाद। तेलंगाना को अलग राज्‍य बनाने की मांग को 4 दशक से भी ज्‍यादा का समय हो गया है। 1969 में शुरू हुई यह मांग अब तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के साथ-साथ कांग्रेस के लिए मुश्किलों का सबब बन गई है। यूपीए सरकार जब 2004 में केंद्र की सत्‍ता पर काबिज हुई तो उसने तेलंगाना राज्‍य के लोगों से वादा किया था कि तेलंगाना को अलग राज्‍य बनाया जाएगा। यूपीए अपना दूसरा कार्यकाल भी पूरा करने वाली है और अभी तक उसने अपना यह वादा पूरा नहीं किया है। इस वादे में तब राज्‍य में कांग्रेस की सरकार भी शामिल थी। और जब यह वादा पूरा नहीं हुआ तो तेलंगाना की जनता बेकाबू हो उठी है।

तेलंगाना को अलग राज्‍य बनाने की मांग ने इस साल जब जोर पकड़ा तो शुरुआत में लगा कि यह राजनीति से प्रेरित है। इस आंदोलन में अब तक 7 लाख कर्मचारी शामिल हो चुके हैं। ये कर्मचारी लगभग पिछले 3 हफ्तों से काम पर नहीं लौटे। जिससे काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंदाजन इस आंदोलन की वजह से आंध्र प्रदेश को अब तक 20 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। इसका सबसे ज्‍यादा असर तेलंगाना क्षेत्र पर पड़ रहा है। राज्‍य में कांग्रेस की सरकार है। जिसके ज्‍यादातर मंत्री इस मांग को लेकर इस्‍तीफा दे चुके हैं। केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए वे दिल्‍ली में डेरा डाले बैठे हैं। जिस वजह से मंत्रालयों का काम भी ठप पड़ा है।

यह समझ से परे है कि केंद्र सरकार और राज्‍य सरकार तेलंगाना को अलग राज्‍य बनाने के मुद्दे पर असमंजस में क्‍यों है? तेलंगाना की जनता अपनी मांगों को लेकर बेहद संवेदनशील हो चुकी है। यूपीए के वादे से मुकरने के बाद उनकी संवेदनाएं और भी उग्र हो गईं। तेलंगाना क्षेत्र के सांसद और विधायक अब अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाने से हिचक रहे हैं क्‍योंकि वहां उन्‍हें जनता के गुस्‍से का शिकार होना पड़ेगा। इन विधायकों और सांसदों ने जनता को खुश करने के लिए और केंद्र व राज्‍य सरकार पर दबाव बनाने के लिए इस्‍तीफा भी दे दिया था।

तेलंगाना राज्‍य को अलग राज्‍य बनाने की मांग को लेकर पूर आंध्र प्रदेश पिछले 3 महीनों से सुलग रहा है। फिर भी केंद्र सरकार व राज्‍य सरकार इस मामले पर मंथन करने में जुटी हुई हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बागी हो चुके अपनी पार्टी के सांसदों और विधायकों से इस मामले का हल निकालने का आश्‍वासन दिया था। अब न ही कांग्रेस के अपने नेता पीएम के व‍ादों पर विश्‍वास कर रहे हैं और न ही तेलंगाना की जनता। इस आंदोलन की वजह से तेलंगाना क्षेत्र बर्बादी की ओर बढ़ रहा है। पहले ही इस आंदोलन ने पूरे राज्‍य को कई साल पीछे धकेल दिया है। सरकार कोई भी निर्णय ले उसे वहां की जनता के साथ-साथ हैदराबाद के बारे में भी विचार करना होगा।

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