प्रधानमंत्री के नाम मायावती का सातवां पत्र

प्रदेश के राजनीति में मायावती के पत्र चर्चा का विषय बने हुए हैं। पिछले दस दिनों में मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन ङ्क्षसह को सात भेजे हर पत्र में एक नयी बात कही गयी। पहले मुसलमानों को आबादी के अनुपात आरक्षण, राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत और जाटों को आरक्षण देने जैसी मांग वाला पत्र भेज चुकी हैं।
मायावती ने एक और पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि योजना आयोग ने शहरी गरीबों के लिये 32 रूपया और ग्रामीण गरीबों के लिये 26 रूपया तय किया है। मुख्यमंत्री मायावती का कहना है कि इस आय में शहर या गांव में एक दिन गुजर बसर करना असंभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा है कि गरीबी निर्धारण हमेशा चुनौतीपूर्ण और दुरूह प्रक्रिया रही है।
मायावती ने इस बारे में योजना आयोग की भी आलोचना की है और कहा है कि योजना आयोग सिफारिश बनावटी तस्वीर पेश करती है। आयोग की रिपोर्ट में स्वास्थ्य, शिक्षा और जूते चप्पलों को शामिल नहीं किया गया है। मायावती ने पत्र में लिखा है कि योजना आयोग की रिपोर्ट में खाद्य पदार्थों पर होने वाले कुछ खर्च को छिपाया गया है। इससे गरीबों का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा जो ठीक नहीं है। मायावती ने मांग की है कि केन्द्र सरकार गरीबी रेखा के मापदंड पर फिर से विचार करे और इस मामले में राज्य सरकारों से भी बात करे। उन्होंनें प्रधानमंत्री से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप की भी मांग की है।












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