2जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर पीएमओ को सांसदों ने किया था सतर्क

जिन लोगों ने ये पत्र लिखे हैं उसमें कांग्रेस के पूर्व सांसद सुरेंद्र प्रकाश गोयल, निर्दलीय राजीव चंद्रशेखर, भाजपा के मुरली मनोहर जोशी, माकपा के सीताराम येचुरी तथा योजना राज्य मंत्री अश्वनी कुमार शामिल हैं। इस सूची में विभिन्न मंत्रालयों का प्रधानमंत्री के साथ संवाद शामिल नहीं है। जोशी ने दो दिसंबर 2007 को अपने पत्र में स्पेक्ट्रम आवंटन में कुछ निजी कंपनियों का बेवजह समर्थन करने तथा सुरक्षा संबंधी मामलों पर चिंता जताई थी। जोशी ने पत्र में लिखा था कि स्पेक्ट्रम आवंटन में सतर्कता नहीं बरती गई तो राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। राज्यसभा सदस्य अमर सिंह ने भी 17 नवंबर 2008 को पीएमओ को लिखे पत्र में पुराने जीएसएम आपरेटरों से बिना अतिरिक्त राशि लिए अतिरिक्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने का मामला उठाया था।
हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पत्रों पर कुछ का जवाब तो दिया पर कुछ को उन्होंने छुआ तक नहीं है। न ही इन पत्रों की गंभीरता को समझा गया है। क्योंकि यदि ऐसा होता तो 1 लाख 76 हजार करोड़ का स्पेक्ट्रम घोटाला नहीं होता। गौरतलब है कि 2जी स्पेक्ट्रम के लिए लाइसेंसों का आवंटन 2008 में किया गया जिस पर बड़ा विवाद हो गया है। इसमें पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा सहित कई सांसद, वरिष्ठ अधिकारी इस समय जेल में की हवा खा रहे हैं।












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