यूपी में मृतक के खिलाफ लूट का मुकदमा

उत्तर प्रदेश में ऐसे ढेरों उदाहरण भरे पड़े हैं जिसमें पुलिस ने कभी मृतक को जिन्दा बता दिया तो कभी जिन्दा को मृतक साबित कर दिया। मुजफ्फरनगर में भी ऐसी ही एक घटना हुई जब तितावी थाना क्षेत्र के गांव करवाड़ा में गत दो सितम्बर गांव में रहने वाले शिव कुमार पुत्र पंतराम की दो बेटियां सोनिया व अंजलि पड़ोस में रहने वाले अजित की पत्नी संगीता के साथ खेतों में चारा लेने गयी थीं।
इस दौरान संगीता व अंजलि के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। अंजलि ने अपनी बहन सोनिया साथ मिलकर संगीता को जमकर खरी खोटी सुनायी। संगीता ने घर आकर सारी बात अपने पति अजित को बता दी। पत्नी की बात सुनकर आक्रोषित अंजित ने अपने भाइयों धीरज, लोकेन्द्र, अमरजीत व पिता हरबीर ने शिवकुमार के घर हमला बोल दिया। इस दौरान शिव कुमार व उसके पिता पंतराम घर पर ही थे।
हमलावर पूरी तैयारी से थे जिस कारण उन लोगों ने पंतराम को लाठी डण्डों से जमकर पीटा जिससे उसकी मौैत हो गयी। पंतराम की मौत के बाद हमलावर फरार हो गए। शिव कुमार ने इसकी जानकारी पुलिस को दी तो पुलिस ने सभी हमलावरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सभी घर वालों के जेल जाने के बाद आरोपियों के परिवार वालों ने नया पैंतरा अपनाते हुए शिकायतकर्ता के खिलाफ लूट का मामला दर्ज कराने की योजना बनायी।
शुरूआती दौर में उन्होंने थाने में मामला दर्ज कराने का प्रयास किया लेकिन सफलता न मिलने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। हत्यारोपी हरबीर की पत्नी कस्तूरी ने आरोप लगाया कि पंतराम, उसके शिव कुमार व शिव चरण, शिव कुमार की पत्नी मुन्नी तथा बेटी सोनिया व अंजलि ने उसके घर लूटपाट की। अदालत ने प्रथम दृष्टया लूट का मामला मानते हुए पुलिस को सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच के आदेश कर दिए। पुलिस ने मामला तो दर्र्ज कर लिया लेकिन उसने अदालत को यह नहीं बताया कि जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है उनमें से एक की मौत हो चुकी है।












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