प्रधानमंत्री को मायावती का एक और पत्र

Mayawati
लखनऊ। मुख्यमंत्री मायावती प्रधानमंत्री को एक और पत्र लिखा। इस बार उन्होंने वर्तमान आरक्षण कोटे को बढ़ाने की मांग की। हालांकि वह मुसलमानों को, जाटों को व गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की वकालत कर चुकी हैं।

मायावती ने अपने पत्र में केन्द्र से अनुसूचित जाति जनजाति के वर्तमान आरक्षण कोटे को बढ़ाने के साथ निजी क्षेत्र एवं न्यायपालिका व कई अन्य क्षेत्रों में आरक्षण देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त जातियों की आबादी बढ़ रही है ऐसे में आवश्यक है कि उनका आरक्षण प्रतिशत भी बढ़े। मायावती ने लिखा कि अनुसूचित जाति जनजाति की सूची में पिछड़े वर्गों की कुछ जातियों को भी शामिल किया जाए।

प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में उन्होंने इस बात का उल्लेख किया है कि डा. भीमराव अम्बेडकर के प्रयासों के चलते संविधान में इन वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। मुख्यमंत्री ने दावा किया बसपा सरकार ने इन वर्गों के हितों के लिए प्रदेश स्तर पर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये जबकि पूर्ववर्ती सरकारों ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया था।

मायावती ने इसके लिए केन्द्र सरकार को दोषी माना है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों को पूरे देश में लागू करने के बारे में केन्द्र सरकार ने भी कोई रूचि नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि कहा कि बसपा सरकार ने वर्ष 2007 में सत्ता में आते ही वर्षों से सरकारी नौकरियों में खाली पड़े अनुसूचित जाति जनजाति के आरक्षित पदों के बैकलॉग को पूरा किया था।

उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार ने इन वर्गों के गरीब लोगों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए 25 लाख रुपये तक के सरकारी ठेकों में आरक्षण की व्यवस्था पहली बार लागू की थी। इसके अलावा उनकी सरकार ने सरकारी विभागों, निगमों व परिषदों आदि में आउट सोॄसग के जरिये कराये जा रहे कार्य में भी आरक्षण की व्यवस्था भी लागू की।

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